विस्तृत उत्तर
कर्म सिद्धांत के अनुसार किसी भी लोक में जाना जीव के संचित, प्रारब्ध और क्रियमाण कर्मों का परिणाम है। तलातल बिल-स्वर्ग है, इसलिए यहाँ उन जीवात्माओं का जन्म होता है जिन्होंने पूर्व जन्मों में घोर तपस्या, दान और यज्ञ तो किए, पर उनका उद्देश्य आत्म-कल्याण या ईश्वर प्राप्ति नहीं था। उनके कर्म भौतिक ऐश्वर्य, शारीरिक सुख, शक्ति और विलासिता प्राप्त करने की लालसा से प्रेरित थे। ऐसे पुण्य कर्म उन्हें नरक से बचाते हैं, पर माया और भोग में आसक्ति के कारण वे तलातल को प्राप्त करते हैं।
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