विस्तृत उत्तर
काव्या माता और शुक्राचार्य का संबंध माता-पुत्र का था। शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे और काव्या माता उनकी माता होने के कारण असुरों के लिए मातृवत सम्मानित थीं। जब शुक्राचार्य मृत संजीवनी विद्या के लिए तपस्या में गए हुए थे, तब असुरों पर इंद्र ने आक्रमण किया। असुर भागकर भृगु आश्रम पहुँचे और काव्या माता से शरण माँगी। काव्या माता ने उन्हें अपने पुत्र के शिष्य और शरणागत प्राणी मानकर संरक्षण दिया। यही संबंध कथा में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि काव्या माता के वध ने शुक्राचार्य के मन में देवताओं के प्रति स्थायी रोष पैदा किया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
