श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनने कौन आ सकता है?कथा सुनने के लिये परिवार सहित सबको बुलाया गया है; धनहीन, रोगी, पापी, संतानहीन और मोक्ष चाहने वाले भी इसे सुनें।#श्रोता#भागवत कथा#सर्वजन
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में किन लोगों को बुलाना चाहिए?कथा में परिवार सहित जनसमुदाय, स्त्रियाँ, शूद्र, हरिकथा से दूर लोग, विरक्त वैष्णव और कीर्तन-प्रेमियों को बुलाने की बात कही गई है।#निमंत्रण#भागवत कथा#वैष्णव
श्रीमद्भागवतभागवत कथा की तैयारी कब शुरू करें?तैयारी मुहूर्त और धन-व्यवस्था से शुरू होती है; बिछाने की सामग्री पाँच दिन पहले जुटाने और वक्ता को एक दिन पहले क्षौर कराने को कहा गया है।#कथा तैयारी#भागवत सप्ताह#मंडप
श्रीमद्भागवतभागवत कथा का मंडप कैसे बनाएं?मंडप ऊँचा, केले के खंभों से सुसज्जित, फल-पुष्प-पत्तों और चंदोवे से अलंकृत तथा ध्वजाओं से सजाया हुआ बताया गया है।#मंडप#भागवत कथा#कथा तैयारी
श्रीमद्भागवतभागवत कथा कहाँ करानी चाहिए?भागवत कथा तीर्थ, वन या घर में कराई जा सकती है; मुख्य बात है कि स्थान विस्तृत, शुद्ध और सज्जित हो।#कथा स्थान#भागवत कथा#तीर्थ
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के शुभ महीने कौन से हैं?भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, आषाढ़ और श्रावण कथा आरंभ के शुभ महीने बताए गए हैं।#भागवत कथा#शुभ महीने#श्रावण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के नित्य पाठ से क्या मिलता है?इस पवित्र आख्यान के नित्य पाठ से अपुनर्भव, यानी पुनर्जन्म से छूटने का फल बताया गया है।#नित्य पाठ#भागवत कथा#मोक्ष
श्रीमद्भागवतगोकर्ण कथा सुनने का फल क्या है?गोकर्ण कथा का एक अक्षर भी कानों से ग्रहण करने वालों को फिर गर्भ में नहीं आना पड़ा, ऐसा फल बताया गया है।#गोकर्ण कथा#श्रवण फल#पाप नाश
श्रीमद्भागवतश्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है?कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।#श्राद्ध#भागवत कथा#पितृ तृप्ति
श्रीमद्भागवतकथा सुनने से पाप कैसे जलते हैं?भागवत सप्ताह को अग्नि के समान कहा गया है, जो मन-वचन-कर्म से हुए नए-पुराने सभी पापों को जला देता है।#कथा श्रवण#पाप#अग्नि
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से सबकी मुक्ति कैसे हुई?दूसरी सप्ताह कथा के बाद भगवान प्रकट हुए और गोकर्ण की कृपा से गाँव के सभी जीव विमानों पर चढ़ाकर हरिलोक भेजे गए।#सर्वमुक्ति#भागवत कथा#गोकर्ण
श्रीमद्भागवतश्रावण मास में भागवत कथा का फल क्या है?श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर सप्ताह कथा कही; उसके बाद भगवान विमानों सहित प्रकट हुए और श्रोताओं को दिव्य गति मिली।#श्रावण मास#भागवत कथा#सप्ताह
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।#भगवान कृष्ण#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से वैकुंठ कैसे मिलता है?धुंधुकारी के लिये वैकुंठवासी पार्षद विमान लेकर आए; उन्होंने कहा कि सही श्रवण-मनन से सबको वैकुंठ फल मिल सकता है।#वैकुंठ#भागवत कथा#श्रवण फल
श्रीमद्भागवतभागवत कथा को तीर्थ क्यों कहा गया है?भागवत कथा को तीर्थ कहा गया है क्योंकि वह संसार के कीचड़ को धोती है और हृदय में स्थित होकर मुक्ति देती है।#कथा तीर्थ#भागवत कथा#मुक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से कर्म कैसे नष्ट होते हैं?सप्ताह श्रवण को पाप जलाने वाली अग्नि और कर्म क्षीण करने वाला साधन कहा गया है।#कर्म#पाप नाश#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।#संशय#भागवत कथा#हृदय
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से हृदय की गांठ कैसे खुलती है?कहा गया है कि सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, संशय कटते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।#हृदय ग्रंथि#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतकथा में एकाग्रता क्यों जरूरी है?एकाग्रता इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रमाद से श्रवण और चंचल चित्त से जप निष्फल हो जाता है।#एकाग्रता#कथा श्रवण#मनन
श्रीमद्भागवतगुरु वचन पर विश्वास क्यों जरूरी है?कथा का यथार्थ फल पाने के नियमों में गुरु वचन पर विश्वास को स्पष्ट रूप से रखा गया है।#गुरु वचन#विश्वास#श्रवण फल
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में श्रद्धा क्यों जरूरी है?श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि गुरु वचन में विश्वास और स्थिर मन के बिना कथा श्रवण का पूरा फल नहीं मिलता।#श्रद्धा#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतकथा सुनने वालों को अलग-अलग फल क्यों मिलता है?फल का भेद श्रवण के भेद से हुआ; सबने सुना, पर धुंधुकारी ने निराहार रहकर स्थिर मन से मनन भी किया।#कथा फल#फलभेद#श्रवण
श्रीमद्भागवतकथा सुनने का पूरा फल कैसे मिलता है?पूरा फल गुरु वचन में विश्वास, दीनता, मन-दोषों पर विजय, कथा में एकाग्रता और श्रवण के बाद मनन से मिलता है।#कथा फल#श्रवण#मनन
श्रीमद्भागवतकेवल कथा सुनना काफी है या मनन भी जरूरी है?कथा में साफ कहा गया है कि केवल श्रवण समान था, पर मनन अलग था; इसलिए फल में भेद हुआ।#कथा श्रवण#मनन#श्रवण फल
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनते समय मन कैसा होना चाहिए?कथा सुनते समय मन श्रद्धायुक्त, एकाग्र, दीनभाव वाला और गुरु वचन में विश्वास रखने वाला होना चाहिए।#कथा श्रवण#मन#एकाग्रता
श्रीमद्भागवतभागवत सुनने से मुक्ति कैसे मिलती है?भागवत श्रवण से मुक्ति तब फलित होती है जब श्रद्धा, मनन, एकाग्रता और गुरु वचन में विश्वास जुड़ता है।#भागवत श्रवण#मुक्ति#मनन
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से प्रेत मुक्ति कैसे होती है?सूर्यदेव ने भागवत सप्ताह को मुक्ति का उपाय बताया; सात दिन कथा सुनकर धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।#भागवत कथा#प्रेत मुक्ति#सप्ताह
श्रीमद्भागवतगोकर्ण धुंधुकारी कथा क्या है?गोकर्ण-धुंधुकारी कथा का आरंभ आत्मदेव, धुंधुली, फल, धुंधुकारी और गोकर्ण के जन्म से होता है।#गोकर्ण कथा#धुंधुकारी#आत्मदेव
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से भक्ति कैसे जागती है?कहा गया है कि भागवत कथा के शब्द और कथा-रस से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पुष्ट होकर तरुण हो जाते हैं।#भक्ति#भागवत कथा#ज्ञान वैराग्य
श्रीमद्भागवतभागवत कथा तीर्थों से श्रेष्ठ क्यों है?कहा गया है कि गंगा, गया, काशी, पुष्कर और प्रयाग भी फल की दृष्टि से भागवत कथा की बराबरी नहीं कर सकते।#भागवत कथा#तीर्थ#गंगा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से पाप मिटते हैं?भागवत कथा, पाठ, श्रवण, दर्शन और सेवन को पाप नष्ट करने वाला बताया गया है।#भागवत कथा#पाप नाश#श्रवण
श्रीमद्भागवतघर में भागवत कथा कराने से क्या होता है?स्रोत के अनुसार जिस घर में नित्य भागवत कथा होती है, वह घर तीर्थरूप हो जाता है और वहाँ रहने वालों के पाप नष्ट होते हैं।#घर में भागवत कथा#तीर्थ#पाप नाश
श्रीमद्भागवतभागवत कथा की विधि क्या है?भागवत कथा के लिये पवित्र स्थान, श्रद्धापूर्वक श्रवण, सत्य, ब्रह्मचर्य और कलियुग में सात दिन की विधि बताई गई है।#भागवत कथा विधि#श्रवण#सत्य
श्रीमद्भागवतभागवत कथा कितने दिन की होती है?सामान्य रूप से हर समय श्रवण श्रेष्ठ कहा गया है, पर कलियुग के लिये सात दिन का भागवत सप्ताह विधान बताया गया है।#भागवत कथा#भागवत सप्ताह#श्रवण विधि
श्रीमद्भागवतभागवत कथा कहाँ करें?सनकादि नारदजी को हरिद्वार के पास आनंद नामक गंगातट पर भागवत कथा करने को कहते हैं।#भागवत कथा#हरिद्वार#गंगा तट
श्रीमद्भागवतभागवत कथा को अमृत से श्रेष्ठ क्यों कहा गया है?कथा में देवताओं का अमृत भी भागवत-कथामृत के सामने कम माना गया, क्योंकि भागवत भक्ति और परम फल देने वाली है।#भागवत कथा#अमृत#शुकदेव
श्रीमद्भागवतभागवत कथा मन को कैसे शुद्ध करती है?सूतजी के अनुसार मन की शुद्धि के लिये श्रीमद्भागवत से श्रेष्ठ कोई साधन नहीं है।#मन की शुद्धि#भागवत कथा#भक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनने के क्या लाभ हैं?भागवत कथा को पवित्र करने वाली, कृष्ण-प्राप्ति कराने वाली, भक्ति बढ़ाने वाली और वैकुंठफलदायक कहा गया है।#भागवत कथा#श्रवण#भक्ति