श्रीमद्भागवतकृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त कैसे रहे?कृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त रहे क्योंकि वे परमेश्वर हैं; वे अपनी माया से मनुष्यलोक में लीला करते हैं, पर प्रकृति के गुण उन्हें बांध नहीं पाते।#कृष्ण गृहस्थ जीवन#कृष्ण निर्लिप्त#कृष्ण लीला
श्रीमद्भागवतकृष्ण भक्तों से कैसे मिलते हैं?कृष्ण भक्तों और नगरवासियों से उनकी योग्यता के अनुसार मिले: किसी को प्रणाम किया, किसी से बोले, किसी को गले लगाया, किसी से हाथ मिलाया और किसी को प्रेमभरी दृष्टि दी।#कृष्ण भक्त#कृष्ण मिलन#भक्ति
श्रीमद्भागवतद्वारका में कृष्ण का स्वागत कैसे हुआ?द्वारका में कृष्ण का स्वागत भेंट, स्तुति, वेदपाठ, शंख-तुरही, ब्राह्मणों, हाथी, रथों, नर्तकों, गायकों और प्रेम से उमड़े परिजनों के साथ हुआ।#कृष्ण स्वागत#द्वारकावासी#वसुदेव
श्रीमद्भागवतकृष्ण के स्वागत में द्वारका कैसे सजाई गई?कृष्ण के स्वागत में द्वारका के फाटक, राजमार्ग, बाजार, चौक और घरों के द्वार बंदनवार, ध्वज, फूल, अक्षत, कलश, धूप और दीप से सजाए गए।#द्वारका सजावट#कृष्ण स्वागत#द्वारका उत्सव
श्रीमद्भागवतयुधिष्ठिर ने भीष्म के बाद राज्य कैसे संभाला?भीष्म के बाद युधिष्ठिर कृष्ण के साथ हस्तिनापुर लौटे, धृतराष्ट्र और गांधारी को सांत्वना दी और धर्मपूर्वक राज्य करने लगे।#युधिष्ठिर#भीष्म#राज्य
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह को मोक्ष कैसे मिला?भीष्म को मोक्ष कृष्ण-स्मरण से मिला; उन्होंने मन, वाणी और दृष्टि कृष्ण में लीन की और भेद-मोह छोड़कर कृष्ण को प्राप्त हुए।#भीष्म मोक्ष#कृष्ण#प्राण त्याग
श्रीमद्भागवतभीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं?भीष्म ने सूर्य का उदाहरण दिया: जैसे एक सूर्य अनेक आँखों से अनेक दिखता है, वैसे एक कृष्ण अनेक हृदयों में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।#कृष्ण#परमात्मा#भीष्म स्तुति
श्रीमद्भागवतभीष्म के अनुसार कृष्ण नारायण कैसे हैं?भीष्म के अनुसार कृष्ण साक्षात आदिपुरुष नारायण हैं, जो यदुवंश में छिपकर लीला करते हैं और सबके आत्मा हैं।#कृष्ण नारायण#भीष्म#परमात्मा
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह की मृत्यु कैसे हुई?भीष्म पितामह ने उत्तरायण में वाणी रोककर मन कृष्ण में लगाया, कृष्ण की स्तुति की और उनके प्राण कृष्ण में लीन हो गए।#भीष्म मृत्यु#उत्तरायण#कृष्ण ध्यान
श्रीमद्भागवतकृष्ण दर्शन से जन्म-मृत्यु कैसे मिटती है?कुंती के अनुसार विपत्ति में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण के चरणकमल का दर्शन जन्म-मृत्यु के प्रवाह को रोक देता है।#कृष्ण दर्शन#जन्म मृत्यु#कुंती
श्रीमद्भागवतयुधिष्ठिर को राज्य वापस कैसे मिला?कृष्ण ने युधिष्ठिर को वह राज्य वापस दिलाया जिसे छल से छीन लिया गया था और द्रौपदी का अपमान करने वाले राजाओं का वध कराया।#युधिष्ठिर#कृष्ण#राज्य
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने युद्ध के बाद पांडवों को कैसे संभाला?कृष्ण ने शोकाकुल लोगों को काल की गति समझाकर सांत्वना दी, युधिष्ठिर को राज्य दिलाया और उनके यश के लिए तीन अश्वमेध यज्ञ कराए।#कृष्ण#पांडव#युद्ध के बाद
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने परीक्षित को गर्भ में कैसे बचाया?कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से भक्तों की रक्षा की और उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढककर परीक्षित को बचाया।#कृष्ण#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतपरीक्षित गर्भ में कैसे बचे?परीक्षित कृष्ण की कृपा से बचे; कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढक दिया और ब्रह्मास्त्र शांत हो गया।#परीक्षित#गर्भ रक्षा#कृष्ण
श्रीमद्भागवतपांडवों ने युद्ध के बाद अंतिम संस्कार कैसे किया?अश्वत्थामा को दंड देने के बाद पांडवों ने कृष्णा द्रौपदी के साथ मृत भाई-बंधुओं की दाह आदि अंतिम क्रियाएँ कीं।#पांडव#अंतिम संस्कार#द्रौपदी पुत्र
श्रीमद्भागवतअश्वत्थामा को कैसे पकड़ा गया?अर्जुन ने कृष्ण को सारथि बनाकर अश्वत्थामा का पीछा किया, ब्रह्मास्त्र का संकट शांत किया और फिर उसे पशु की तरह बाँध लिया।#अश्वत्थामा#अर्जुन#कृष्ण
श्रीमद्भागवतद्रौपदी के पुत्रों की हत्या कैसे हुई?द्रौपदी के पुत्र सो रहे थे; अश्वत्थामा ने उनके सिर काटकर दुर्योधन को भेंट किए।#द्रौपदी पुत्र#हत्या#अश्वत्थामा
श्रीमद्भागवतभागवत से शोक मोह भय कैसे मिटते हैं?भागवत में बताया गया भक्ति-योग जीव को माया से उत्पन्न भ्रम से हटाता है, इसलिए शोक, मोह और भय मिटते हैं।#शोक मोह भय#भागवत#भक्ति योग
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत की रचना कैसे हुई?व्यासजी ने भक्ति-योग से परमात्मा और उनकी माया को देखा, जीवों के अनर्थ का उपाय समझा और श्रीमद्भागवत की रचना की।#श्रीमद्भागवत#वेदव्यास#भक्ति योग
श्रीमद्भागवतभगवान की माया को कैसे समझें?नारदजी को संतों की कृपा से गुप्त ज्ञान मिला, जिससे वे भगवान की माया का प्रभाव समझ सके।#भगवान की माया#ज्ञान#नारद
श्रीमद्भागवतरजोगुण और तमोगुण कैसे दूर होते हैं?हरि के निर्मल यश का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से भक्ति प्रकट हुई, जिसने नारदजी के रजोगुण और तमोगुण को हटाया।#रजोगुण#तमोगुण#भक्ति
श्रीमद्भागवतकृष्ण कथा सुनते-सुनते भक्ति कैसे बढ़ती है?नारदजी ने श्रद्धा से कृष्ण कथा सुनी; पद-पद सुनते हुए भगवान में रुचि हुई और भक्ति प्रकट होकर रज-तम को हटाने लगी।#कृष्ण कथा#भक्ति वृद्धि#श्रवण
श्रीमद्भागवतसत्संग से भक्ति कैसे पैदा होती है?सत्संग में सेवा, प्रसाद, कृष्ण कथा और श्रद्धापूर्वक श्रवण से नारदजी के हृदय में भक्ति प्रकट हुई।#सत्संग#भक्ति#कृष्ण कथा
श्रीमद्भागवतसाधुओं की सेवा से मन कैसे शुद्ध होता है?साधुओं की सेवा से नारदजी का चित्त शुद्ध हुआ, पाप नष्ट हुए और कृष्ण कथा में उनकी रुचि जागी।#साधु सेवा#मन शुद्धि#नारद
श्रीमद्भागवतदुखी मन को शांति कैसे मिले?नारदजी के अनुसार दुखी मन को भगवान की कथा, कृष्ण सेवा और भगवान को समर्पित कर्म से वास्तविक शांति मिलती है।#मन की शांति#दुख#कृष्ण सेवा
श्रीमद्भागवतभगवान की लीला सुनने से दुख कैसे मिटता है?नारदजी कहते हैं कि हरि लीला का वर्णन दुखी लोगों के लिए संसार-सागर पार करने की नौका और शांति का उपाय है।#भगवान की लीला#दुख#हरि कथा
श्रीमद्भागवतकर्म बंधन से मुक्ति कैसे मिले?कर्म बंधन से मुक्ति तब होती है जब वही कर्म भगवान की प्रसन्नता के लिए समर्पित होकर किए जाएँ।#कर्म बंधन#मुक्ति#भगवान को अर्पण
श्रीमद्भागवतकर्म भगवान को अर्पित कैसे करें?नारदजी कहते हैं कि समस्त कर्म पुरुषोत्तम भगवान को समर्पित करना ही संसार के तीन तापों की औषधि है।#कर्म समर्पण#भगवान#भक्ति योग
श्रीमद्भागवतकृष्ण कथा सुनने से पाप कैसे मिटते हैं?भगवान के नाम-यश से युक्त वाणी पाप मिटाती है; नारदजी ने संतों की सेवा और कृष्ण कथा सुनकर अपना हृदय शुद्ध किया।#कृष्ण कथा#पाप नाश#सत्संग
श्रीमद्भागवतभागवत कथा शुकदेव से परीक्षित तक कैसे पहुँची?शौनकजी कहते हैं कि भगवान शुकदेवजी ने पुण्यमयी भागवत कथा कही और पूछते हैं कि उनका परीक्षित से संवाद कैसे हुआ।#भागवत कथा#शुकदेव#परीक्षित
श्रीमद्भागवतवेदव्यास का जन्म कैसे हुआ?व्यासजी का जन्म द्वापर युग में महर्षि पराशर से वसुकन्या सत्यवती के गर्भ से बताया गया है।#वेदव्यास जन्म#पराशर#सत्यवती
श्रीमद्भागवतभगवान संसार रचकर भी अलग कैसे रहते हैं?भगवान लीला से संसार की सृष्टि, पालन और संहार करते हैं, पर उसमें आसक्त नहीं होते और सबके भीतर रहते हुए भी स्वतंत्र रहते हैं।#भगवान#सृष्टि#लीला
श्रीमद्भागवतनरसिंह अवतार ने हिरण्यकशिपु को कैसे मारा?नरसिंह अवतार में भगवान ने अत्यंत बलवान हिरण्यकशिपु की छाती अपने नखों से फाड़ दी।#नरसिंह अवतार#हिरण्यकशिपु#भगवान
श्रीमद्भागवतमत्स्य अवतार ने मनु को कैसे बचाया?चाक्षुष मन्वंतर के अंत में जब लोक समुद्र में डूब रहे थे, भगवान ने मत्स्य रूप लेकर पृथ्वी रूपी नाव पर वैवस्वत मनु की रक्षा की।#मत्स्य अवतार#वैवस्वत मनु#प्रलय
श्रीमद्भागवतवराह अवतार ने पृथ्वी को कैसे बचाया?वराह अवतार में भगवान ने रसातल में गई हुई पृथ्वी को निकालने के लिए सूकर रूप धारण किया।#वराह अवतार#पृथ्वी उद्धार#सूकर रूप
श्रीमद्भागवतभगवान सबमें एक होकर भी अलग-अलग कैसे दिखते हैं?भगवान एक हैं, पर जैसे एक अग्नि अलग-अलग लकड़ियों में अनेक-सी दिखती है, वैसे ही वे अनेक जीवों में अलग-अलग से जान पड़ते हैं।#भगवान#जीव#सृष्टि
श्रीमद्भागवतमन के संदेह कैसे मिटते हैं?प्रेममयी भक्ति से आसक्तियाँ मिटती हैं; भगवान का साक्षात्कार होते ही सारे संदेह कट जाते हैं।#संदेह#भक्ति#भगवान साक्षात्कार
श्रीमद्भागवतभगवान का अनुभव कैसे होता है?भागवत श्रवण से प्राप्त ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति और प्रेममयी भक्ति से भगवान के तत्त्व का अनुभव होता है।#भगवान अनुभव#परमात्मा#भक्ति
श्रीमद्भागवतस्थायी भक्ति कैसे मिलती है?महात्मा सेवा, श्रवण की इच्छा, श्रद्धा और निरंतर भागवत-कथा सेवन से अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और स्थायी भक्ति मिलती है।#स्थायी भक्ति#भागवत सेवा#श्रद्धा
श्रीमद्भागवतकाम और लोभ से कैसे बचें?भागवत और भगवद्कथा के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएँ नष्ट होती हैं, फिर काम-लोभ शांत होकर चित्त निर्मल होता है।#काम#लोभ#भागवत
श्रीमद्भागवतबुरी वासनाएँ कैसे मिटती हैं?भगवान की कथा सुनने वालों के हृदय में कृष्ण स्थित होकर अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं; निरंतर भागवत सेवा से वे नष्ट होती हैं।#बुरी वासनाएँ#कृष्ण कथा#भागवत सेवा
श्रीमद्भागवतभगवान की कथा में रुचि कैसे बढ़ती है?महात्मा सेवा से श्रवण की इच्छा और श्रद्धा आती है; कथा सुनने से कृष्ण हृदय की अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं।#भगवत कथा#कथा रुचि#श्रवण
श्रीमद्भागवतसंतों की सेवा से भक्ति कैसे आती है?पवित्र तीर्थों के सेवन से महात्माओं की सेवा, फिर श्रवण की इच्छा, श्रद्धा और अंत में भगवत कथा में रुचि उत्पन्न होती है।#संत सेवा#भक्ति#वासुदेव कथा
श्रीमद्भागवतभगवान को प्रसन्न कैसे करें?अपने धर्म की पूर्ण सिद्धि भगवान को प्रसन्न करने में है; इसलिए एकाग्र मन से उनका श्रवण, कीर्तन, ध्यान और पूजन करना चाहिए।#भगवान को प्रसन्न#श्रवण#कीर्तन
श्रीमद्भागवतभक्ति से ज्ञान और वैराग्य कैसे आते हैं?भगवान वासुदेव में भक्ति लगते ही अनन्य प्रेम से निष्काम ज्ञान और वैराग्य शीघ्र प्रकट होते हैं।#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवतभगवान की भक्ति से मन को शांति कैसे मिलती है?निरंतर और निष्काम भक्ति से हृदय परमात्मा को पाता है, अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और आत्मप्रसाद मिलता है।#मन की शांति#भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवतकलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।#कलियुग#हरि कथा#सूतजी
श्रीमद्भागवतकृष्ण मनुष्य जैसे दिखकर भी भगवान कैसे थे?कृष्ण लोगों के सामने मनुष्य जैसे आचरण करते थे, पर बलराम के साथ उन्होंने ऐसी लीलाएँ और पराक्रम किए जो मनुष्य नहीं कर सकते।#कृष्ण#भगवान#मानव लीला
श्रीमद्भागवतभागवत पुराण मनुष्य का कल्याण कैसे करती है?यह परमात्मा का निरूपण करती है, तीन तापों का नाश बताती है और कलियुग के जीवों के लिये शास्त्रों का सार माँगा गया है।#कल्याण#भागवत पुराण#कलियुग
श्रीमद्भागवतभागवत कथा दारिद्र्य और दुख में कैसे सहारा देती है?दारिद्र्य-दुख से जलते, माया से दबे और संसार-सागर में डूबते लोगों के कल्याण के लिये भागवत गरजती है।#दारिद्र्य#दुख#माया