श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति में कृष्ण के युद्ध रूप का वर्णन क्या है?भीष्म स्तुति में कृष्ण के युद्ध रूप में धूल-पसीने से सजे केश, कवच, बाणों के घाव, रास-चाबुक और पार्थसारथी छवि आती है।#कृष्ण युद्ध रूप#भीष्म स्तुति#महाभारत युद्ध
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।#भीष्म और कृष्ण#कृष्ण#पार्थसारथी
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह शरशय्या कथा क्या है?भीष्म पितामह शरशय्या पर पड़े थे; पांडव, कृष्ण और ऋषि उनके पास गए, उन्होंने धर्म बताया और कृष्ण का ध्यान करते हुए प्राण त्यागे।#भीष्म शरशय्या#कुरुक्षेत्र#युधिष्ठिर
श्रीमद्भागवतपांडव वंश को बचाने की कथा क्या है?पांडव वंश को कृष्ण ने बचाया; उन्होंने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ की रक्षा की।#पांडव वंश#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतअश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र और परीक्षित की कथा क्या है?अश्वत्थामा ने पांडव वंश मिटाने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ा, लेकिन कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा कर दी।#अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतपरीक्षित की जन्म कथा क्या है?परीक्षित की पूरी जन्म-घटना नहीं, बल्कि जन्म से पहले गर्भ में उनकी रक्षा की कथा आती है।#परीक्षित जन्म कथा#उत्तरा गर्भ#अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र
श्रीमद्भागवतद्रौपदी और अश्वत्थामा की कथा क्या है?अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पुत्रों को मारा, पर बँधा हुआ लाए जाने पर द्रौपदी ने गुरु-पुत्र और ब्राह्मण समझकर उसे छोड़ने को कहा।#द्रौपदी#अश्वत्थामा#कृपी
श्रीमद्भागवतअर्जुन और अश्वत्थामा की ब्रह्मास्त्र कथा क्या है?अश्वत्थामा ने भय में ब्रह्मास्त्र चलाया; कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र से उसका निवारण किया और फिर अश्वत्थामा को बाँध लिया।#अर्जुन#अश्वत्थामा#ब्रह्मास्त्र
श्रीमद्भागवतअश्वत्थामा की कथा क्या है?अश्वत्थामा ने द्रौपदी के सोए हुए पुत्रों की हत्या की, ब्रह्मास्त्र चलाया, अर्जुन ने उसे पकड़ा और अंत में उसकी मणि निकालकर उसे शिविर से बाहर किया गया।#अश्वत्थामा#द्रौपदी पुत्र#ब्रह्मास्त्र
श्रीमद्भागवतकृष्ण कथा सुनते-सुनते भक्ति कैसे बढ़ती है?नारदजी ने श्रद्धा से कृष्ण कथा सुनी; पद-पद सुनते हुए भगवान में रुचि हुई और भक्ति प्रकट होकर रज-तम को हटाने लगी।#कृष्ण कथा#भक्ति वृद्धि#श्रवण
श्रीमद्भागवतकृष्ण कथा सुनने से पाप कैसे मिटते हैं?भगवान के नाम-यश से युक्त वाणी पाप मिटाती है; नारदजी ने संतों की सेवा और कृष्ण कथा सुनकर अपना हृदय शुद्ध किया।#कृष्ण कथा#पाप नाश#सत्संग
श्रीमद्भागवतभगवान की कथा लिखना क्यों जरूरी है?भगवान की कथा इसलिए जरूरी है क्योंकि वही जीवों को बंधन से मुक्त करती है और दुखी मनुष्यों को शांति देती है।#भगवान की कथा#कृष्ण लीला#भक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा शुकदेव से परीक्षित तक कैसे पहुँची?शौनकजी कहते हैं कि भगवान शुकदेवजी ने पुण्यमयी भागवत कथा कही और पूछते हैं कि उनका परीक्षित से संवाद कैसे हुआ।#भागवत कथा#शुकदेव#परीक्षित
श्रीमद्भागवतपरीक्षित ने भागवत कथा क्यों सुनी?कारण का पूरा विस्तार आगे की कथा में आता है। शौनकजी पूछते हैं कि शुकदेव और परीक्षित का संवाद कैसे हुआ जिसमें भागवत कही गई।#परीक्षित#भागवत कथा#शुकदेव
श्रीमद्भागवतसूतजी ने भागवत कथा किससे सीखी?सूतजी शुकदेवजी की भागवत कथा के समय वहाँ बैठे थे और उनकी कृपा से उन्होंने इसका अध्ययन किया।#सूतजी#शुकदेव#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभगवान की जन्म कथा पढ़ने का फल क्या है?जो मनुष्य भगवान के दिव्य जन्म की कथा को नियमपूर्वक सुबह-शाम प्रेम से पढ़ता है, वह दुखों से छूट जाता है।#भगवान जन्म कथा#पाठ फल#दुख मुक्ति
श्रीमद्भागवतभगवान की कथा में रुचि कैसे बढ़ती है?महात्मा सेवा से श्रवण की इच्छा और श्रद्धा आती है; कथा सुनने से कृष्ण हृदय की अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं।#भगवत कथा#कथा रुचि#श्रवण
श्रीमद्भागवतकलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।#कलियुग#हरि कथा#सूतजी
श्रीमद्भागवतकृष्ण कथा सुनने की इच्छा क्यों बढ़ती है?क्योंकि भगवान का यश कलियुग के पापों को हरता है और रसिक श्रोताओं को उनकी लीला में पद-पद पर नया रस मिलता है।#कृष्ण कथा#हरि कथा#भगवत लीला
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनाने वाले को क्या फल मिलता है?जो नियमपूर्वक भक्ति से सुनता है और जो शुद्ध वैष्णवों के सामने सुनाता है, दोनों यथार्थ फल पाते हैं; उनके लिये कुछ असाध्य नहीं।#कथा सुनाना#वक्ता फल#वैकुंठ
श्रीमद्भागवतआधे क्षण की भागवत कथा सुनने का फल क्या है?असार संसार में कल्याण के लिये आधे क्षण भी शुककथा का पान करने को कहा गया है; कान में प्रवेश करते ही मुक्ति की बात कही गई है।#आधा क्षण#भागवत कथा#मुक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा भवरोग की औषधि क्यों है?कलियुग में भागवत कथा भवरोग की रामबाण औषधि, कृष्णप्रिय, पाप-नाशक, मुक्ति का कारण और भक्ति बढ़ाने वाली कही गई है।#भवरोग#औषधि#मुक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा दारिद्र्य और दुख में कैसे सहारा देती है?दारिद्र्य-दुख से जलते, माया से दबे और संसार-सागर में डूबते लोगों के कल्याण के लिये भागवत गरजती है।#दारिद्र्य#दुख#माया
श्रीमद्भागवतकथा और कीर्तन से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?कथा-कीर्तन देखकर भगवान प्रसन्न हुए और कहा कि तुम्हारी भक्ति ने मुझे वश में कर लिया, वर माँगो।#कथा#कीर्तन#भगवान प्रसन्न
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में भगवान कैसे प्रकट होते हैं?शुकदेवजी के वचन के बीच सभा में प्रह्लाद, बलि, उद्धव और अर्जुन आदि पार्षदों सहित श्रीहरि प्रकट हुए।#भगवान प्रकट#भागवत कथा#कीर्तन
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के बाद प्रसाद और तुलसी क्यों देते हैं?कथा समाप्ति पर वक्ता श्रोताओं को प्रसाद, तुलसी और प्रसादमालाएँ देता है; इसके बाद कीर्तन होता है।#प्रसाद#तुलसी#कथा समाप्ति
श्रीमद्भागवतकथा पूरी होने पर क्या करना चाहिए?कथा पूरी होने पर भागवत पुस्तक और वक्ता की भक्ति से पूजा, प्रसाद-तुलसी वितरण, कीर्तन, जयघोष, शंखध्वनि और दान करना चाहिए।#कथा समाप्ति#पूजा#प्रसाद
श्रीमद्भागवतसंतान सुख के लिए भागवत कथा क्यों सुनते हैं?जिन स्त्रियों को संतान-संबंधी दुख हो, उन्हें प्रयत्नपूर्वक कथा सुनने को कहा गया है; विधिपूर्वक श्रवण से उत्तम फल मिलता है।#संतान सुख#भागवत कथा#स्त्री
श्रीमद्भागवतरोगी लोग भागवत कथा क्यों सुनें?धनहीन, क्षयरोगी, अन्य रोगों से पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मोक्ष इच्छुक लोगों को कथा सुनने को कहा गया है।#रोगी#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनते समय किनसे बात नहीं करनी चाहिए?नियम से कथा सुनने वाले को रजस्वला, अंत्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन, ब्राह्मणद्वेषी और वेदबाह्य लोगों से बातचीत न करने को कहा गया है।#बातचीत#श्रवण नियम#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में निंदा से क्यों बचना चाहिए?कथा सुनने वाले को वेद, वैष्णव, ब्राह्मण, गुरु, गौसेवक, स्त्री, राजा और महापुरुषों की निंदा से बचना चाहिए।#निंदा#भागवत कथा#वाणी संयम
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में क्रोध और लोभ क्यों छोड़ें?कथा सुनने वाले को काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए।#क्रोध#लोभ#मन शुद्धि
श्रीमद्भागवतउपवास से कथा सुनने में बाधा हो तो क्या करें?यदि उपवास से श्रवण में बाधा हो तो भोजन करना बेहतर है; वही नियम लें जो कथा सुनने में सहायक हो।#उपवास#कथा श्रवण#आहार
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में फालतू बात क्यों नहीं करनी चाहिए?कथा में शुद्ध चित्त से ध्यान रखना है; विराम में भी व्यर्थ बात छोड़कर प्रसंगानुसार कीर्तन करना बताया गया है।#व्यर्थ बात#कथा श्रवण#एकाग्रता
श्रीमद्भागवतकथा विराम में कीर्तन क्यों करना चाहिए?विराम में कीर्तन इसलिए बताया गया है कि कथा का प्रसंग और भगवान के गुण श्रोताओं के मन में बने रहें, व्यर्थ बात न हो।#कीर्तन#कथा विराम#वैष्णव
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में दोपहर का विराम क्यों होता है?दोपहर में दो घड़ी कथा विराम रखकर उसी प्रसंग के अनुसार वैष्णवों को भगवान के गुणों का कीर्तन करना बताया गया है।#दोपहर विराम#कीर्तन#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा किस समय शुरू करनी चाहिए?कथा सूर्योदय से आरंभ करने और मध्यम स्वर में साढ़े तीन पहर तक सुनाने की बात कही गई है।#कथा समय#सूर्योदय#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा रोज कितनी देर सुननी चाहिए?वक्ता को सूर्योदय से कथा आरंभ कर साढ़े तीन पहर तक मध्यम स्वर में कथा पढ़नी चाहिए, बीच में दो घड़ी विराम है।#कथा समय#श्रवण#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनते समय क्या छोड़ना चाहिए?कथा सुनते समय लोक, धन, घर-पुत्र की चिंता, काम, क्रोध, लोभ, निंदा, अनुचित संग और अशुद्ध आहार छोड़ना चाहिए।#श्रवण नियम#त्याग#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के वक्ता की पूजा क्यों करें?वक्ता को शुकस्वरूप मानकर पूजते हैं और उससे कथा के प्रकाश से अज्ञान नष्ट करने की प्रार्थना करते हैं।#वक्ता पूजा#भागवत कथा#शुक स्वरूप
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में नारियल क्यों रखते हैं?भागवत पुस्तक के आगे नारियल रखकर नमस्कार और स्तुति करने का विधान है, जहाँ पुस्तक को श्रीकृष्णस्वरूप माना गया है।#नारियल#भागवत पूजा#पुस्तक पूजा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में भगवान कृष्ण की पूजा कैसे करें?मंडल में श्रीहरि की स्थापना कर श्रीकृष्ण को लक्ष्य बनाकर मंत्रोच्चार सहित षोडशोपचार पूजा, दक्षिणा और नमस्कार करना बताया गया है।#कृष्ण पूजा#षोडशोपचार#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से पहले पितृ तर्पण क्यों करें?गणेश पूजा के बाद पितरों का तर्पण और पूर्व पापों की शुद्धि के लिये प्रायश्चित्त करने का निर्देश है।#पितृ तर्पण#भागवत कथा#प्रायश्चित्त
श्रीमद्भागवतभागवत कथा शुरू करने से पहले क्या करें?आरंभ से पहले वक्ता का क्षौर, स्नान, नित्यकर्म, गणेश पूजा, पितृ तर्पण, श्रीहरि स्थापना, श्रीकृष्ण व भागवत पूजा और वक्ता पूजन बताया गया है।#कथा आरंभ#पूजा#संकल्प
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में श्रोता किस दिशा में बैठें?श्रोता वक्ता की दिशा के अनुसार पूर्वमुख या उत्तरमुख बैठें; एक मत से वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।#श्रोता#दिशा#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में वक्ता किस दिशा में बैठे?वक्ता उत्तरमुख हो तो श्रोता पूर्वमुख बैठें; वक्ता पूर्वमुख हो तो श्रोता उत्तरमुख बैठें, या दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।#वक्ता दिशा#आसन#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में सहायक वक्ता क्यों चाहिए?वक्ता के पास ऐसा विद्वान सहायक रखना चाहिए जो श्रोताओं के संशय दूर कर सके और लोगों को समझाने में कुशल हो।#सहायक वक्ता#संशय#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में कैसे वक्ता से बचना चाहिए?जो अनेक धर्मों के भ्रम में पड़े हों, स्त्री-लोलुप हों या पाखंड का प्रचार करें, ऐसे पंडित भी भागवत वाचन के लिये अयोग्य बताए गए हैं।#वक्ता चयन#पाखंड#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा का वक्ता किसे बनाना चाहिए?भागवत कथा का वक्ता वैष्णव ब्राह्मण, वेद-शास्त्र में पारंगत, दृष्टांत-कुशल, धीर, विवेकी और निःस्पृह होना चाहिए।#वक्ता#भागवत कथा#वैष्णव ब्राह्मण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के वक्ता कैसे होने चाहिए?वक्ता वेद-शास्त्र की व्याख्या में समर्थ, दृष्टांत देने में कुशल, विवेकी, निःस्पृह और वैष्णव ब्राह्मण होना चाहिए।#वक्ता#भागवत कथा#वैष्णव