विस्तृत उत्तर
महामाया ने मधु और कैटभ को अपनी दिव्य मोहशक्ति से मोहित किया। युद्ध के दौरान जब विष्णु ने देखा कि वरदान के कारण असुरों का वध कठिन है, तब उन्होंने देवी का स्मरण किया। देवी ने अत्यंत मनोहर और सम्मोहक रूप धारण किया, जिससे दोनों असुरों का ध्यान युद्ध से हट गया। उनकी बुद्धि पर अहंकार, आकर्षण और आत्ममुग्धता का आवरण छा गया। इसी अवस्था में विष्णु ने उनकी वीरता की प्रशंसा की और उन्हें वर देने के लिए प्रेरित किया। मोहग्रस्त होकर वे स्वयं वरदाता बनने लगे और अपने ही वचन से मृत्यु को बुला बैठे।
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