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विस्तृत उत्तर
महामाया ने मधु कैटभ को मारने में दो तरह से सहायता की। पहले उन्होंने ब्रह्मा जी की स्तुति से प्रसन्न होकर विष्णु को योगनिद्रा से जगाया, जिससे भगवान असुरों का सामना कर सके। बाद में जब युद्ध लंबा चला और इच्छा-मृत्यु वरदान के कारण असुर नहीं मरे, तब विष्णु ने महामाया का स्मरण किया। देवी ने अपनी मोहशक्ति से मधु और कैटभ को अहंकार और भ्रम में डाल दिया। उसी मोह में वे स्वयं विष्णु को वर देने लगे, और भगवान ने उनसे अपनी मृत्यु का वर मांग लिया। इस प्रकार महामाया ने वध का मार्ग बनाया।
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