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विस्तृत उत्तर
महातल लोक में प्रकाश विशाल नागों के फनों पर स्थित दिव्य नागमणियों से होता है। महातल पृथ्वी से 50,000 योजन नीचे स्थित है, इसलिए वहाँ सूर्य, चंद्र या तारों का प्रकाश नहीं पहुँचता। लेकिन महातल में रहने वाले नागों के फनों पर अलौकिक और दिव्य मणियाँ सुशोभित हैं। उनकी तीव्र और निर्मल चमक से महातल का संपूर्ण अंधकार नष्ट हो जाता है और वहाँ निरंतर सुखद, शीतल और आनंददायक प्रकाश फैला रहता है।
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