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विस्तृत उत्तर
मातामही को रुद्र स्वरूपा इसलिए माना जाता है क्योंकि मातृ-वंश में भी तीन पीढ़ियों का वही देव-वर्ग लागू होता है। प्रथम पीढ़ी माता वसु स्वरूपा है, द्वितीय पीढ़ी पितामही या मातामही रुद्र स्वरूपा है, और तृतीय पीढ़ी प्रपितामही या प्रमातामही आदित्य स्वरूपा है। रुद्र पितृ वर्गीकरण में दूसरी पीढ़ी का देव स्तर है, जो सूक्ष्म प्राणिक अवस्था, शुद्धि और ऊर्ध्वगमन से जुड़ा है। इसलिए मातृ-पक्ष की दूसरी पीढ़ी मातामही को रुद्र स्वरूपा माना जाता है।
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