विस्तृत उत्तर
नाभाग और शिव जी की कथा सत्यनिष्ठा की कथा है। नाभाग ने अपने पिता के कहने पर आङ्गिरस ब्राह्मणों को यज्ञ में सही सूक्त बताकर सहायता की। यज्ञ पूरा होने पर ब्राह्मणों ने बचा हुआ धन उन्हें दे दिया। जब नाभाग वह धन लेने लगे, तब उत्तर दिशा से एक काले पुरुष आए और बोले कि यज्ञ में बचा हुआ धन रुद्र का है। नाभाग ने विवाद नहीं किया और पिता से पूछा। पिता ने रुद्र का अधिकार स्वीकार किया। नाभाग ने सत्य माना, जिससे भगवान रुद्र प्रसन्न हुए और उन्हें धन के साथ ब्रह्मज्ञान भी दिया।
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