विस्तृत उत्तर
नारद जी ने वृकासुर को शिव जी की पूजा करने को इसलिए कहा क्योंकि शिव जी आशुतोष कहलाते हैं। आशुतोष का अर्थ है वह देवता जो शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। वृकासुर जल्दी वरदान चाहता था और उसने नारद जी से यही पूछा था कि कौन-सा देवता उसे कम समय में शक्ति दे सकता है। नारद जी ने शिव जी का उदाहरण रावण और बाणासुर जैसे शक्तिशाली भक्तों के संदर्भ में दिया। परंतु इस कथा में नारद जी का उत्तर लीला को आगे बढ़ाने वाला भी है। अंततः वृकासुर की दुष्टता उसी वरदान के कारण प्रकट हुई और विष्णु की माया से उसका अंत हुआ।
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