विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार नवमी श्राद्ध से पीढ़ियों से चला आ रहा मातृ-दोष समाप्त होता है।
नवमी श्राद्ध से मातृ दोष मिटता है क्या को संदर्भ सहित समझें
नवमी श्राद्ध से मातृ दोष मिटता है क्या का सबसे सीधा सार यह है: हाँ, मातृ-दोष शांति होती है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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विशुद्ध चक्र और महर्लोक का क्या संबंध है?
विशुद्ध चक्र महर्लोक का सूक्ष्म शारीरिक समकक्ष है। जैसे महर्लोक भौतिक और आध्यात्मिक लोकों के बीच सेतु है वैसे ही विशुद्ध चक्र निचले और उच्चतर चक्रों के बीच सेतु है।
गरुड़ पुराण में महर्लोक को कण्ठ क्यों कहा गया है?
गरुड़ पुराण के सूक्ष्म शरीर-विज्ञान में महर्लोक कण्ठ (गले) क्षेत्र में है। यह विशुद्ध चक्र का स्थान है जो उच्चतर चेतना और सत्य का मुख्य द्वार है।
पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत क्या है?
पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत कहता है — जो ब्रह्माण्ड में है वही मानव शरीर में भी है। देवता, लोक और नक्षत्र सभी शरीर के विभिन्न अंगों में सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।
गरुड़ पुराण में पापियों के यमलोक मार्ग का वर्णन कैसे है?
गरुड़ पुराण में पापियों का 86,000 योजन का यमलोक मार्ग अत्यंत भयंकर है — जलती रेत, वैतरणी नदी, यमदूतों के कोड़े। पुण्यात्मा के लिए यही मार्ग सुलभ हो जाता है।
गरुड़ पुराण में अजामिल का उदाहरण क्यों दिया गया है?
अजामिल ने मृत्यु के समय अपने पुत्र 'नारायण' को पुकारा था। भगवान के नाम के प्रभाव से विष्णुदूत प्रकट हुए और यमदूतों से बचाकर वैकुंठ भेजा। यह नाम-महिमा का प्रमाण है।
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