विस्तृत उत्तर
पद्म पुराण की परंपरा में भृगु श्राप की कथा काव्या माता वध से जुड़ी है। देवासुर संघर्ष में असुर भृगु आश्रम में शरण लेते हैं। काव्या माता उन्हें बचाने के लिए देवताओं को रोकती हैं और इंद्र को स्तब्ध कर देती हैं। इंद्र विष्णु के शरीर में आश्रय लेते हैं। काव्या माता जब इंद्र-विष्णु को भस्म करने का संकल्प प्रकट करती हैं, तब विष्णु सुदर्शन चक्र से उनका वध करते हैं। भृगु ऋषि लौटकर अपनी पत्नी के वध से दुखी होते हैं और विष्णु को पृथ्वी पर जन्म लेने तथा पत्नी-वियोग सहने का श्राप देते हैं।
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