विस्तृत उत्तर
नारद जी ने वर्णन किया कि पाताल में दैत्यों और दानवों की जो कन्याएं विचरण करती हैं, उनका रूप और लावण्य इतना सम्मोहक है कि वे कठोर से कठोर तपस्वियों का भी मन मोह सकती हैं। पाताल के बिल-स्वर्गों में दैत्य, दानव और नाग गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हैं। यहाँ के निवासी अपनी पत्नी, पुत्र, बंधु-बांधव और अनुचरों के साथ सदा प्रमुदित और अनुरक्त रहते हैं। इनके भवन, उद्यान और क्रीड़ा-स्थल अत्यंत समृद्ध हैं और यहाँ स्वर्ग से भी अधिक काम-भोग, ऐश्वर्य, आनंद और विभूति उपलब्ध है।
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