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विस्तृत उत्तर
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन चाक्षुष मन्वन्तर में हुआ था, जिसे छठा मन्वन्तर माना जाता है। यह कोई सामान्य ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय स्तर की पौराणिक घटना मानी जाती है। उस समय देवताओं का तेज दुर्वासा ऋषि के श्राप से क्षीण हो गया था और असुरों का प्रभाव बढ़ गया था। इसी संकट को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने क्षीरसागर मंथन की योजना बताई। इसलिए समुद्र मंथन को समय की सामान्य गणना से अधिक पुराणों के मन्वन्तर-चक्र में समझा जाता है।
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