विस्तृत उत्तर
संवर्तक अग्नि पाताल से उठकर स्वर्ग तक सब कुछ भस्म करती है। यह महाप्रलय के संहार चरण में अव्यक्त अस्त्र का अग्नि-रूप है।
संवर्तक अग्नि कहाँ से उठती है को संदर्भ सहित समझें
संवर्तक अग्नि कहाँ से उठती है का सबसे सीधा सार यह है: यह पाताल से उठकर स्वर्ग तक फैलती है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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संकर्षण की अग्नि क्या है?
संकर्षण की अग्नि (कालानल) पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है और पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।
संकर्षण की अग्नि का उद्गम कहाँ से होता है?
संकर्षण की अग्नि (कालानल) का उद्गम पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग (संकर्षण/अनन्त देव) के मुख से होता है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।
भूलोक के नीचे कौन-कौन से लोक हैं?
भूलोक के नीचे सात अधोलोक हैं — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। यहाँ सर्प-मणियों का प्रकाश है और असुर-नाग-दानव रहते हैं।
भुवर्लोक के राक्षस पाताल के असुरों से कैसे अलग हैं?
भुवर्लोक के राक्षस वायुमंडलीय और सूक्ष्म होते हैं जो अंतरिक्ष में विचरण करते हैं जबकि पाताल के असुर भूमि के नीचे रहने वाली स्थूल सत्ताएं हैं।
सात अधोलोक कौन-कौन से हैं?
सात अधोलोक हैं — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। ये सभी पृथ्वी के नीचे स्थित हैं।
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