विस्तृत उत्तर
सनातन तत्त्वदृष्टि में शिव और विष्णु में कोई विरोध नहीं है। दोनों परमसत्ता के अभिन्न रूप माने जाते हैं। फिर भी लीला और कार्य के स्तर पर उनका प्रकट रूप अलग दिखाई देता है। भगवान विष्णु जगत के पालन, संतुलन और धर्म-रक्षा के अधिष्ठाता हैं। भगवान शिव वैराग्य, संहार, करुणा और तप के परम देव हैं। वृकासुर कथा में शिव जी वरदान देने वाले करुणामय आशुतोष रूप में हैं, जबकि विष्णु संकट को नीति और योगमाया से हल करने वाले रक्षक रूप में हैं। इसलिए अंतर कार्य-रूप का है, तत्त्व का नहीं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
