विस्तृत उत्तर
शिव जी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं क्योंकि उनका स्वभाव अत्यंत सरल, करुणामय और आशुतोष है। वे भक्त के बाहरी वैभव से अधिक उसकी तीव्रता और भाव देखते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए महंगे अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा से अर्पित जल और बेलपत्र भी पर्याप्त हो सकते हैं। इसी कारण देव, दानव और मनुष्य सभी उनकी शरण में जाते हैं। परंतु यह शीघ्र प्रसन्नता कभी-कभी दुष्टों द्वारा दुरुपयोग भी की जाती है। वृकासुर ने कठोर तपस्या की और शिव जी प्रसन्न हुए, लेकिन उसने वरदान का दुरुपयोग करना चाहा।
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