विस्तृत उत्तर
शिव जी ने भस्मासुर को तब बचाया जब वह अपनी ही गर्दन काटकर अग्नि में अर्पित करने वाला था। भगवान शिव अग्निकुंड से प्रकट हुए और तुरंत उसके हाथ पकड़ लिए। उन्होंने उसे रोका और करुणा से समझाया कि इतनी भयानक पीड़ा देने की आवश्यकता नहीं थी। शिव जी के दिव्य स्पर्श से वृकासुर का रक्तरंजित और क्षत-विक्षत शरीर तुरंत स्वस्थ हो गया। उसके घाव भर गए और वह पहले से अधिक पुष्ट हो गया। यह प्रसंग बताता है कि शिव जी अत्यंत करुणामय हैं; वे तपस्वी की रक्षा करते हैं, चाहे उसका भाव अभी शुद्ध न भी हो।
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