विस्तृत उत्तर
‘शिवाय विष्णु रूपाय, शिव रूपाय विष्णवे। शिवस्य हृदयं विष्णुः, विष्णोश्च हृदयं शिवः॥’ श्लोक का अर्थ है कि शिव विष्णु रूप हैं और विष्णु शिव रूप हैं। शिव के हृदय में विष्णु का वास है और विष्णु के हृदय में शिव का वास है। यह श्लोक हरि-हर अभेद का संदेश देता है। इसका भाव यह है कि भक्त को शिव और विष्णु में विरोध नहीं देखना चाहिए। भस्मासुर कथा में भी यही तत्त्व प्रकट होता है: शिव जी वरदान देते हैं, संकट आता है, और विष्णु जी शिव की मर्यादा बचाते हुए असुर का अंत करते हैं।
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