विस्तृत उत्तर
शुक्राचार्य को मृत संजीवनी विद्या भगवान शिव से प्राप्त हुई मानी जाती है। वे जानते थे कि देवासुर युद्ध में असुरों की पराजय का मुख्य कारण उनके वीरों का मर जाना है। यदि मृत योद्धा पुनर्जीवित हो सकें, तो असुरों की शक्ति बनी रहेगी। इसलिए शुक्राचार्य असुरों को छोड़कर भगवान शिव की कठोर तपस्या करने गए। उनकी अनुपस्थिति में ही इंद्र ने असुरों पर हमला किया, जिससे काव्या माता वध की घटना घटी। बाद में शुक्राचार्य मृत संजीवनी विद्या लेकर लौटे और असुरों को पुनर्जीवन देने में समर्थ हुए।
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