विस्तृत उत्तर
शुक्राचार्य मृत संजीवनी विद्या इसलिए चाहते थे क्योंकि असुर देवताओं के साथ निरंतर युद्ध में भारी हानि उठा रहे थे। देवताओं के पास मजबूत संगठन, दिव्य अस्त्र और स्वर्गीय समर्थन था, जबकि असुरों को बार-बार अपने वीर योद्धाओं को खोना पड़ता था। शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे और उन्हें अपने शिष्यों की रक्षा की चिंता थी। मृत संजीवनी विद्या से वे युद्धभूमि में मरे हुए असुरों को पुनर्जीवित कर सकते थे। यही विद्या आगे चलकर असुरों की सबसे बड़ी शक्ति बनी और देवासुर संघर्ष को और भी तीखा कर दिया।
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