विस्तृत उत्तर
शुक्राचार्य ने असुरों का पक्ष इसलिए लिया क्योंकि वे उनके गुरु थे और उन्हें अपना शिष्य-समुदाय मानते थे। वे असुरों को केवल दैत्य-जाति नहीं, बल्कि मार्गदर्शन के योग्य प्राणी मानते थे। देवासुर युद्ध में असुर भारी हानि उठा रहे थे, इसलिए शुक्राचार्य ने मृत संजीवनी विद्या पाने का प्रयास किया। उनकी अनुपस्थिति में देवताओं ने असुरों पर आक्रमण किया और काव्या माता का वध हुआ। इस घटना ने शुक्राचार्य के मन में देवताओं के प्रति अविश्वास बढ़ाया। परिणामस्वरूप उन्होंने असुरों को नीति, तप और संजीवनी शक्ति से और अधिक मजबूत किया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
