विस्तृत उत्तर
सुतल लोक सात अधोलोकों की श्रृंखला का तीसरा महत्वपूर्ण लोक है। सात अधोलोकों के नाम क्रमशः अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल हैं। सुतल अपनी पारलौकिक दिव्यता, अभूतपूर्व वास्तुकला और साक्षात् भगवान विष्णु की प्रत्यक्ष उपस्थिति के कारण संपूर्ण ब्रह्मांड में एक अत्यंत विशिष्ट और वंदनीय स्थान रखता है। शास्त्रीय और पौराणिक दृष्टि से सुतल लोक को मात्र एक अंधकारमय पाताल या दंड भुगतने वाला नरक मानना अत्यंत भ्रामक और अज्ञानतापूर्ण धारणा है। श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण और ब्रह्मांड पुराण जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में इन सातों अधोलोकों को सामूहिक रूप से 'बिल-स्वर्ग' अर्थात 'भूमिगत स्वर्ग' की संज्ञा दी गई है। बिल-स्वर्ग का तात्पर्य यह है कि यहाँ का भौतिक ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएं, प्राकृतिक सौंदर्य और विलासिता ऊर्ध्व लोकों के स्वर्ग, अर्थात देवराज इन्द्र के लोक, से भी कहीं अधिक उन्नत, समृद्ध और निर्बाध हैं।
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