विस्तृत उत्तर
तलातल जाने वाले जीव नरक की यातना इसलिए नहीं भोगते क्योंकि उनके पुण्य कर्म बहुत प्रबल होते हैं। उन्होंने तपस्या, दान और यज्ञ जैसे कर्म किए होते हैं, पर उनका उद्देश्य आत्म-कल्याण या ईश्वर प्राप्ति नहीं, बल्कि भौतिक ऐश्वर्य, शारीरिक सुख, शक्ति और विलासिता प्राप्त करना होता है। ऐसे पुण्य उन्हें नरक की यातनाओं से बचाते हैं और तलातल जैसे बिल-स्वर्ग में जन्म देते हैं। वहाँ उन्हें रोग, वृद्धावस्था और दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि वे भोग-सुख और ऐश्वर्य का अनुभव करते हैं।
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