विस्तृत उत्तर
तपोलोक सत्यलोक से ठीक नीचे स्थित है। तपोलोक आत्मा की परम शुद्ध और सात्त्विक अवस्था का प्रत्यक्ष लोक है, जहाँ से जीव केवल सत्यलोक या परब्रह्म की ओर ही अग्रसर होता है। यह लोक उत्कृष्ट तपस्या, अखंड ब्रह्मचर्य, जितेंद्रियता और भगवान वासुदेव के प्रति अनन्य निष्काम भक्ति का प्रतिफल है। सत्यलोक ब्रह्मांड का सर्वोच्च लोक है। इस क्रम में तपोलोक उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ जीव आवागमन के चक्र से मुक्त होने की तैयारी करता है और सत्यलोक या परब्रह्म की दिशा में आगे बढ़ता है।
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