विस्तृत उत्तर
वितल लोक में शिव और भवानी का निवास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रकृति और पुरुष की आदिम ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र है। भगवान शिव और माता भवानी यहाँ प्रजापति ब्रह्मा की सृष्टि की वृद्धि करने के उद्देश्य से स्थित हैं। उनका दिव्य मिलन संपूर्ण चराचर जगत को प्राणशक्ति और प्रजनन क्षमता प्रदान करने वाली सघन ऊर्जा का प्रतीक है। असुरों और मायावी शक्तियों के लोक में भगवान शिव की उपस्थिति यह भी बताती है कि ब्रह्मांड का कोई भी भाग ईश्वर की सत्ता और नियंत्रण शक्ति से बाहर नहीं है। चाहे कोई क्षेत्र भौतिकता और तमोगुण से परिपूर्ण क्यों न हो, वहाँ भी ईश्वर की शक्ति का संचार होता है।
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