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विस्तृत उत्तर
वितल लोक पृथ्वी के धरातल से बीस हजार योजन नीचे स्थित है। महर्षि पराशर के अनुसार पृथ्वी के नीचे अतल, वितल आदि सातों अधोलोक एक-दूसरे के नीचे दस-दस हजार योजन की दूरी पर स्थित हैं। पृथ्वी से दस हजार योजन नीचे अतल लोक है। अतल लोक की सीमा समाप्त होने के बाद पृथ्वी से बीस हजार योजन की गहराई पर वितल लोक का विस्तार आरंभ होता है। प्रत्येक अधोलोक की अपनी ऊँचाई और गहराई भी दस हजार योजन बताई गई है।
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