विस्तृत उत्तर
वृकासुर और भस्मासुर को सामान्यतः एक ही असुर माना जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण में उसका नाम वृकासुर आता है, जबकि लोककथाओं, क्षेत्रीय परंपराओं और कुछ शिव-पुराण संबंधी वर्णनों में वही कथा भस्मासुर नाम से प्रसिद्ध है। भस्मासुर नाम उसके वरदान के कारण लोकप्रिय हुआ, क्योंकि वह जिसके सिर पर हाथ रखता, वह भस्म हो सकता था। कथा का मूल प्रसंग दोनों नामों में एक ही है: असुर ने शिव जी की तपस्या की, विनाशकारी वरदान पाया, शिव जी पर ही उसे आजमाना चाहा और अंत में विष्णु की माया से अपने ही हाथ से नष्ट हुआ।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
