विस्तृत उत्तर
वृंदा ने अग्नि-समाधि इसलिए ली क्योंकि उसे अपने पति जालंधर की मृत्यु और अपने सतीत्व के साथ हुए छल का सत्य ज्ञात हो गया था। वह एक परम पतिव्रता स्त्री थी, इसलिए पति-वियोग उसके लिए असहनीय था। उसने भगवान विष्णु को श्राप दिया और फिर अपने पति के प्रति अंतिम निष्ठा निभाते हुए अग्नि में प्रवेश किया। यह प्रसंग अत्यंत करुण है, क्योंकि वृंदा दोषी नहीं थी; वह धर्म और भक्ति के बीच फँसी हुई स्त्री थी। उसके त्याग और तप के कारण ही वह आगे तुलसी रूप में प्रकट हुई और विष्णु पूजा में अमर स्थान प्राप्त किया।
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