श्रीमद्भागवतमहाभारत क्यों लिखा गया?महाभारत इसलिए लिखा गया कि जो लोग वेद-श्रवण के अधिकारी नहीं थे, वे भी धर्म-कर्म और कल्याणकारी मार्ग समझ सकें।#महाभारत#वेदव्यास#स्त्री शूद्र
लोकमहाभारत में हंस गीतामहाभारत शांति पर्व में हंस गीता मोक्षधर्म और साधु-गुणों का उपदेश है।#महाभारत#शांति पर्व#हंस गीता
लोकएकादशी श्राद्ध से तेजस्वी पुत्र मिलता है क्या?हाँ, तेजस्वी पुत्रों का फल बताया गया है।#तेजस्वी पुत्र#महाभारत#एकादशी
लोकमहाभारत के अनुसार पितर वंशजों के कर्मों को कैसे देखते हैं?महाभारत पितरों को सजीव चेतना मानता है जो वंशजों के धर्म-अधर्म पर दृष्टि रखते हैं।#महाभारत#पितर#वंशज कर्म
लोकअष्ट वसु कौन हैं?अष्ट वसु हैं: आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभास।#अष्ट वसु#वसु#पितृकर्म
लोकयक्ष ने पांडवों की परीक्षा क्यों ली?यक्ष ने पांडवों की धर्म-बुद्धि की परीक्षा ली; युधिष्ठिर के सही उत्तरों से संतुष्ट होकर उसने भाइयों को जीवित किया।#यक्ष परीक्षा#पांडव#युधिष्ठिर
लोकयक्ष-युधिष्ठिर संवाद क्या है?यक्ष-युधिष्ठिर संवाद में सरोवर के यक्ष ने युधिष्ठिर से धर्म-जीवन के गूढ़ प्रश्न पूछे और उत्तरों से संतुष्ट होकर पांडवों को जीवित किया।#यक्ष युधिष्ठिर संवाद#महाभारत#अरण्य पर्व
लोकतक्षक ने राजा परीक्षित को क्यों डसा?राजा परीक्षित को सात दिन में तक्षक द्वारा डंसे जाने का शाप मिला था, इसलिए तक्षक ने ब्राह्मण वेश में उन्हें डसा।#तक्षक#राजा परीक्षित#शाप
लोकरसातल में रहने का सुख कैसे बताया गया है?रसातल में रहने का सुख नागलोक, स्वर्ग, विमानों और त्रिविष्टप से भी श्रेष्ठ बताया गया है।#रसातल सुख#रसातल निवासी#स्वर्ग से श्रेष्ठ
लोकसुरभि माता रसातल में क्यों रहती हैं?सुरभि माता रसातल में दिव्य दूध का स्राव करती हैं, जिससे क्षीर सागर की उत्पत्ति हुई।#सुरभि माता#रसातल#दिव्य दूध
भक्ति, मंत्र और उपासनाविष्णु सहस्रनाम का क्या महत्व है?विष्णु सहस्रनाम: भीष्म ने बाणों की शय्या पर युधिष्ठिर को विष्णु के 1000 नाम बताए। वेदव्यास रचित। कलयुग में नित्य पाठ/श्रवण से: वाणी शुद्ध, मन-श्वास स्थिर, नकारात्मकता नाश, सांसारिक कल्याण और मोक्ष प्राप्ति।#विष्णु सहस्रनाम#भीष्म#महाभारत
पाशुपत अस्त्र साधनामहाभारत के किस अध्याय में पाशुपतास्त्र का वर्णन है?महाभारत के वन पर्व के अध्याय 91 में इसका विस्तृत वर्णन है।#महाभारत#अध्याय#वन पर्व
पाशुपत अस्त्र साधनामहाभारत के अनुसार अर्जुन ने पाशुपतास्त्र कैसे प्राप्त किया था?अर्जुन ने भगवान शिव की तपस्या कर मंत्र, उपसंहार और प्रायश्चित सहित पाशुपतास्त्र प्राप्त किया था।#अर्जुन#महाभारत#शिव
पाशुपत अस्त्र साधनापाशुपतास्त्र साधना का मुख्य शास्त्रीय आधार क्या है?यह साधना महाभारत, अग्नि पुराण, शिव पुराण और रुद्रयामल तंत्र जैसे प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है।#शिव पुराण#महाभारत#अग्नि पुराण
पौराणिक कथामहाभारत में पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत क्यों किया था?वनवास की कठिनाइयां दूर करने और अपना खोया हुआ राज्य वापस पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने 14 साल तक यह व्रत किया था।#पांडव#श्रीकृष्ण#महाभारत
पौराणिक रहस्यइस योग का नाम राजा 'नल' के नाम पर क्यों रखा गया है?राजा नल का रूप बिगड़ गया था (बाहुक बन गए थे) लेकिन वे बहुत चतुर और धन वापस पाने में माहिर थे। नल योग भी इंसान को शारीरिक कमी के बावजूद बहुत चतुर और अमीर बनाता है।#राजा नल#महाभारत#कमलनाल
इतिहास एवं पुराणराजा बभ्रुवाहन किस युग में किस नगर में रहते थे?बभ्रुवाहन अर्जुन के पुत्र थे जो द्वापर युग में मणिपुर नगर के राजा थे। इनका संबंध महाभारत (अश्वमेध पर्व) से है — गरुड़ पुराण में इनका कोई उल्लेख नहीं मिलता।#बभ्रुवाहन#मणिपुर#अर्जुन
शास्त्र ज्ञानअहिंसा परमो धर्मः का पूरा श्लोक क्या है?महाभारत, अनुशासन पर्व 115.23 — 'अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥' अर्थ: अहिंसा परम धर्म, परम तप और परम सत्य है। 'धर्म हिंसा तथैव च' वाला अर्धश्लोक प्रामाणिक महाभारत में उपलब्ध नहीं है।#अहिंसा#महाभारत#धर्म
महाभारतअभिमन्यु चक्रव्यूह में कैसे फँसा?तेरहवें दिन अर्जुन के दूर जाने पर द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह बनाया। अभिमन्यु व्यूह में घुसना जानते थे पर निकलना नहीं। अकेले छः परतें तोड़ने के बाद जयद्रथ ने शेष पांडवों को रोक दिया और कौरव महारथियों ने घेरकर अधर्मपूर्वक अभिमन्यु का वध किया।#अभिमन्यु#चक्रव्यूह#जयद्रथ
महाभारतयुद्ध से पहले दोनों पक्षों में कितने योद्धा थे?महाभारत में कौरव पक्ष के पास 11 अक्षौहिणी और पांडव पक्ष के पास 7 अक्षौहिणी सेना थी। कुल 18 अक्षौहिणी — जो लाखों योद्धाओं के बराबर थी। 18 दिन के युद्ध के बाद दोनों पक्षों से मिलाकर केवल 18 के आसपास योद्धा जीवित बचे।#कुरुक्षेत्र#सेना#कौरव
महाभारतपांडवों का अज्ञातवास कहाँ बीता?पांडवों ने अपना एक वर्ष का अज्ञातवास राजस्थान स्थित मत्स्य देश की राजधानी विराट नगर (आधुनिक बैराठ) में राजा विराट के यहाँ भिन्न-भिन्न छद्मवेश धारण करके बिताया।#पांडव#अज्ञातवास#विराट नगर
महाभारतविदुर कौन थे महाभारत में?विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री, धृतराष्ट्र और पांडु के भाई तथा यमराज के अवतार माने जाते हैं। दासी-पुत्र होने के बावजूद वे अपने नैतिक बल, ज्ञान और सत्यनिष्ठा से महाभारत के सबसे आदरणीय पात्र बने। उन्होंने सदैव धर्म और पांडवों का साथ दिया।#विदुर#धर्मराज#हस्तिनापुर
देवी-देवता एवं उपासनाविष्णु के 1000 नामों में सबसे शक्तिशाली कौन सेविष्णु के 1000 नामों में सर्वाधिक शक्तिशाली हैं — विष्णु, नारायण, जनार्दन, गोविंद, माधव, पुरुषोत्तम, अच्युत, वासुदेव, हृषीकेश और अनंत। ये नाम महाभारत के अनुशासन पर्व में संकलित हैं।#विष्णु सहस्रनाम#विष्णु के नाम#नारायण
आधुनिक धर्म प्रश्नबच्चों रामायण महाभारत कहानी कैसे सुनाएंराम=hero, हनुमान=superhero। हर रात 1 episode। Amar Chitra Katha/YouTube। Moral subtle; preaching नहीं।#बच्चे#रामायण#महाभारत
शास्त्र व्याख्यामहाभारत में धर्म का सबसे बड़ा पाठ'धर्मस्य सूक्ष्मा गतिः' — धर्म जटिल; सही-गलत सदैव स्पष्ट नहीं। गीता 2.47 (निष्काम कर्म), 'यतो धर्मस्ततो जयः' (धर्म विजय), 18.66 (शरणागति)। अन्याय सहना भी अधर्म।#महाभारत#धर्म#पाठ
हिंदू दर्शनमहाभारत में कितने पर्व हैं प्रत्येक का सारमहाभारत — 18 पर्व, ~1 लाख श्लोक। मुख्य: आदि (कुरुवंश), सभा (द्यूत-चीरहरण), वन (वनवास), भीष्म (**गीता**), द्रोण (अभिमन्यु), कर्ण (कर्ण वध), शांति (भीष्म उपदेश — सबसे बड़ा), मौसल (यादव संहार), स्वर्गारोहण (अंतिम यात्रा)।#महाभारत#18 पर्व#व्यास
हिंदू दर्शनअश्वत्थामा अमर हैं क्या और आज कहाँअश्वत्थामा चिरंजीवी हैं — परंतु शाप से, वरदान से नहीं। सोते पांचालों की हत्या और गर्भस्थ परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र के दंडस्वरूप कृष्ण ने मणि छीनी और शाप दिया — रोग, दुर्गंध, एकाकीपन में अनंत काल तक भटकना। 'आज कहाँ' — लोक मान्यता; शास्त्रीय रूप से अनिश्चित।#अश्वत्थामा#चिरंजीवी#शाप
महाभारत परिचयमहाभारत की कहानी क्या है?महाभारत वेदव्यास रचित 1,00,000 श्लोक, 18 पर्वों का विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है। पांडव और कौरव के बीच हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए संघर्ष — द्यूत, वनवास, 18 दिन का कुरुक्षेत्र युद्ध। श्री कृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान इसी युद्ध में दिया।#महाभारत#कुरुक्षेत्र#पांडव
गीता परिचयभगवद गीता किसने लिखी?भगवद गीता महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत (भीष्म पर्व) का भाग है — किंतु ज्ञान भगवान श्री कृष्ण का है जो उन्होंने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में सुनाया। 18 अध्याय, 700 श्लोक। सांख्य योग, कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग — चार मुख्य मार्ग।#भगवद गीता#वेदव्यास#कृष्ण
अस्त्र शस्त्रअश्वत्थामा के पास कौन से अस्त्र थे?अश्वत्थामा के पास ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र (पिता द्रोण से) और जन्म से माथे में 'सिरोन रत्न' मणि थी जो सभी से रक्षा करती थी। यह मणि बाद में अर्जुन ने निकाल ली।#अश्वत्थामा#ब्रह्मशिरास्त्र#नारायणास्त्र
शिव अवतारशिव के किरात अवतार में अर्जुन से युद्ध कैसे हुआ?वनवास में अर्जुन शिव की तपस्या कर रहे थे। दैत्य मूकासुर शूकर रूप में आया। किरात वेषधारी शिव और अर्जुन ने एक साथ बाण चलाए। विवाद में युद्ध हुआ, अर्जुन हारे, तब शिव प्रकट हुए और अर्जुन को पाशुपतास्त्र दिया।#किरात अवतार#अर्जुन युद्ध#पाशुपतास्त्र
वास्तु तस्वीर नियमघर में महाभारत की तस्वीर लगानी चाहिए या नहीं?महाभारत के युद्ध दृश्य लगाना अशुभ है — पारिवारिक कलह और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। लेकिन श्रीकृष्ण का गीतोपदेश (अर्जुन को गीता उपदेश) लगाना शुभ है — यह ज्ञान और शांति का प्रतीक है।#महाभारत#युद्ध तस्वीर#वास्तु दोष
अस्त्र शस्त्रगांडीव धनुष की विशेषता क्या थी?गांडीव एक लाख धनुषों के बराबर था, 108 अकाट्य प्रत्यंचाएं थीं, एक साथ कई लक्ष्य भेद सकता था, और जो धारण करे उसमें दिव्य शक्ति आती थी। साथ में अक्षय तरकश था जिसमें बाण कभी खत्म नहीं होते।#गांडीव विशेषता#अक्षय तरकश#एक लाख धनुष
अस्त्र शस्त्रनारायणास्त्र महाभारत में किसने चलाया था?नारायणास्त्र महाभारत में अश्वत्थामा ने चलाया था — पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु का बदला लेने के लिए। द्रोण ने यह अस्त्र भगवान नारायण की उपासना से प्राप्त किया और अश्वत्थामा को दिया था।#नारायणास्त्र#अश्वत्थामा#महाभारत
अस्त्र शस्त्रभीष्म का धनुष कैसा था?भीष्म का धनुष परशुराम से प्राप्त और अत्यंत शक्तिशाली था। इसकी प्रत्यंचा की आवाज से शत्रु कांप उठते थे। उनके पास ब्रह्मास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्र थे। धनुष का विशेष नाम पुराणों में स्पष्ट नहीं है।#भीष्म#भीष्म धनुष#महाभारत
अस्त्र शस्त्रकर्ण के विजय धनुष की क्या विशेषता थी?विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता। इस धनुष को हाथ से छोड़ने पर ही कर्ण का वध संभव हुआ।#विजय धनुष#कर्ण#अखंड
विष्णु उपासनाविष्णु सहस्रनाम पाठ का सही तरीका क्या है?विष्णु सहस्रनाम का पाठ प्रातःकाल स्नान के बाद, शुद्ध आसन पर बैठकर, एकाग्र मन और शुद्ध उच्चारण के साथ करना चाहिए। एकादशी, पूर्णिमा और गुरुवार को पाठ विशेष फलदायी है। श्रद्धा और नियमितता इसकी सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।#विष्णु सहस्रनाम#पाठ विधि#नियम
अस्त्र शस्त्रपाशुपतास्त्र अर्जुन को कैसे मिला?पाशुपतास्त्र अर्जुन को शिव ने इंद्रकील पर्वत पर स्वयं प्रकट होकर दिया था। अर्जुन ने घोर तपस्या की, किरात-रूपी शिव से युद्ध किया, और अंत में पूजा करने पर शिव प्रसन्न हुए।#पाशुपतास्त्र#अर्जुन शिव तपस्या#किरात
अस्त्र शस्त्रअर्जुन के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे?अर्जुन के पास पाशुपतास्त्र (शिव से), ब्रह्मास्त्र (द्रोण से), नारायणास्त्र, वज्रास्त्र (इंद्र से), गांडीव+अक्षय तरकश (अग्नि-वरुण से) सहित अनेक दिव्यास्त्र थे।#अर्जुन अस्त्र#पाशुपतास्त्र#ब्रह्मास्त्र
अस्त्र शस्त्रघटोत्कच के पास कौन से अस्त्र थे?घटोत्कच के पास राक्षसी मायावी अस्त्र, नाना प्रकार के दिव्य-मानवीय-राक्षसी अस्त्र थे। माता हिडिम्बा से सीखी मायाविद्या उसकी मुख्य शक्ति थी। रात्रि में उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती थी।#घटोत्कच#मायावी अस्त्र#राक्षसी शक्ति
शास्त्र ज्ञानअहिंसा परमो धर्मः का पूरा श्लोक और अर्थ क्या?पूरा श्लोक: 'अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च।' अर्थ: अहिंसा परम धर्म है, पर धर्म-रक्षा हेतु हिंसा भी धर्म ही है। अक्सर अधूरा उद्धृत किया जाता है। महाभारत (अनुशासन पर्व) में वर्णित।#अहिंसा#परमो धर्मः#महाभारत
विष्णु अस्त्र शस्त्रकृष्ण को सुदर्शन चक्र किसने दिया?कृष्ण विष्णु के अवतार हैं अतः यह चक्र उनका ही है। महाभारत में खांडव दहन के बदले अग्निदेव ने कृष्ण को चक्र और गदा दी। एक अन्य परंपरा में परशुराम से प्राप्त होने का उल्लेख है।#कृष्ण सुदर्शन चक्र#अग्नि देव#परशुराम
अस्त्र शस्त्रब्रह्मास्त्र का प्रतिकार क्या है?ब्रह्मास्त्र का एकमात्र प्रतिकार दूसरा ब्रह्मास्त्र है। परंतु दो ब्रह्मास्त्रों के टकराने से प्रलय का खतरा होता है। पाशुपतास्त्र भी इसे निरस्त कर सकता है — कुछ ग्रंथों में ऐसा उल्लेख है।#ब्रह्मास्त्र प्रतिकार#दूसरा ब्रह्मास्त्र#पाशुपतास्त्र