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पर्व

मकर — पर्व सम्बन्धित प्रश्न(55)

मकर पर्व पर शास्त्रीय व्याख्या — विधि, कथा, मंत्र और महत्व — एक स्थान पर। कुल 55 प्रश्न उपलब्ध हैं।  अगली तिथि (अनुमानित): 14-01-2026

फलश्रुति

मकर संक्रांति का संचित पुण्य कब नष्ट होता है?

मकर संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट होता है: कठोर वचन बोलने से, किसी असहाय/निर्धन/अनाथ/भिक्षुक का अपमान करने से।

#संचित पुण्य नष्ट#कटु वचन#अपमान
फलश्रुति

मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना से कौन से रोग दूर होते हैं?

भविष्य पुराण: सूर्य उपासना से दूर होने वाले रोग — कुष्ठ रोग, नेत्र विकार और हृदय रोग। भगवान सूर्य: आरोग्य, मेधा, यश और दीर्घायु प्रदान करते हैं। प्रमाण: साम्ब ने 12 वर्ष सूर्य उपासना से कुष्ठ रोग मुक्ति पाई।

#सूर्य उपासना रोग#कुष्ठ रोग#नेत्र विकार
फलश्रुति

मकर संक्रांति की पूजा और स्नान से क्या फायदे होते हैं?

मकर संक्रांति फल: (1) आरोग्य: कुष्ठ, नेत्र, हृदय रोगों से मुक्ति; आरोग्य-मेधा-यश-दीर्घायु, (2) पाप मुक्ति + विष्णु-लोक/शिव-लोक में स्थान, (3) दान कभी क्षय नहीं — परलोक में सहस्र गुना वापस, (4) निष्काम उपासना = मोक्ष।

#मकर संक्रांति फल#पाप मुक्ति#विष्णु लोक
नियम और निषेध

मकर संक्रांति का व्रत कौन कर सकता है?

भविष्य पुराण: ब्राह्मणों से लेकर शूद्रों तक — सभी वर्ण, आयु और लिंग के लोगों को मकर संक्रांति व्रत का पूर्ण अधिकार। क्षमतानुसार मंत्र-सहित या बिना मंत्र। महिलाएँ: सुहाग-सामग्री, कुमकुम, हल्दी, अन्न का दान।

#व्रत पात्रता#भविष्य पुराण#सभी वर्ण
नियम और निषेध

मकर संक्रांति पर दान में क्या नहीं देना चाहिए?

मकर संक्रांति पर दान में वर्जित: बासी या जूठा अन्न, पुराने/फटे-पुराने वस्त्र, काले वस्त्र। दान हमेशा शुद्ध नवान्न (नया अन्न) और उपयोग योग्य उत्तम वस्तुओं का ही करें।

#दान निषेध#बासी अन्न#पुराने वस्त्र
नियम और निषेध

मकर संक्रांति पर किसी का अपमान क्यों नहीं करना चाहिए?

मकर संक्रांति पर: किसी असहाय, निर्धन, अनाथ या भिक्षुक का अपमान न करें। कठोर वचन बोलने से संक्रांति का संचित पुण्य तत्काल नष्ट हो जाता है।

#अपमान निषेध#कटु वचन#संचित पुण्य नष्ट
नियम और निषेध

मकर संक्रांति पर पेड़-पौधे क्यों नहीं काटने चाहिए?

मकर संक्रांति पर पेड़-पौधों की पत्तियाँ तोड़ना, वृक्ष काटना या फसल अकारण काटना = अशुभ। कारण: यह प्रकृति के प्रति सम्मान का दिन है।

#पेड़ काटना निषेध#प्रकृति सम्मान#वृक्ष छेदन
नियम और निषेध

मकर संक्रांति पर दांत साफ करने का क्या नियम है?

मकर संक्रांति पर दंतधावन नियम: दातुन (पेड़ की टहनी) चबाकर दांत साफ करना — निषिद्ध। मुख शुद्धि केवल जल या जड़ी-बूटियों के कुल्ले से करें।

#दंतधावन निषेध#दातुन#मुख शुद्धि
नियम और निषेध

मकर संक्रांति पर क्या नहीं खाना चाहिए?

धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु: मकर संक्रांति पर पूर्णतः वर्जित — लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडे, सिगरेट और तम्बाकू। यह तपस्या का दिन है और तामसिक आहार सबसे बड़ी बाधा।

#मकर संक्रांति आहार निषेध#तामसिक भोजन#लहसुन प्याज मांस
दान विधान

गरीब हो तो मकर संक्रांति पर क्या दान करें?

भविष्य पुराण: गरीब हो तो केवल फलों का दान = गोदान के समान पुण्य। क्षमता अनुसार मंत्र-सहित या मंत्र-रहित दान सभी के लिए मान्य। यह पर्व सबसे समरस और समावेशी है।

#गरीब दान#फल दान#गोदान पुण्य
दान विधान

मकर संक्रांति पर तांबे के पात्र का दान क्यों करते हैं?

मत्स्य पुराण: मकर संक्रांति पर तांबे के पात्र का दान करें। फल: शरीर में सकारात्मक ऊर्जा + आयु, आरोग्य, यश और सौभाग्य में वृद्धि।

#तांबे का पात्र दान#आयु आरोग्य#सकारात्मक ऊर्जा
दान विधान

मकर संक्रांति पर गाय का दान क्यों करते हैं?

मत्स्य पुराण: मकर संक्रांति पर सवत्सा गाय (बछड़े सहित) = यम, रुद्र और धर्म के नाम पर संयमी ब्राह्मण को दान। गरीब हो तो: केवल फलों का दान = गोदान के समान पुण्य।

#गाय दान#सवत्सा धेनु#मत्स्य पुराण
दान विधान

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार क्या दान करें?

राशि अनुसार दान: मेष = ऊनी वस्त्र; वृषभ = गाय-चावल; मिथुन = हरे मूंग; कर्क = घी-चांदी; सिंह = स्वर्ण-गेहूं; कन्या = अन्न-बीज; तुला/वृश्चिक = वस्त्र; धनु = चने की दाल; मकर = तिल-कंबल-ईंधन; कुम्भ = जल-घड़े; मीन = पुष्प-मिष्ठान।

#राशि अनुसार दान#भविष्य पुराण#स्कंद पुराण
दान विधान

मत्स्य पुराण के अनुसार मकर संक्रांति पर क्या दान करें?

मत्स्य पुराण: तीन पात्र अन्न + सवत्सा गाय (बछड़े सहित) = यम, रुद्र, धर्म के नाम पर। सामर्थ्य हो तो: सोने के आभूषण, शैय्या, तांबे के पात्र। तांबे के पात्र का दान = आयु, आरोग्य, यश, सौभाग्य वृद्धि।

#मत्स्य पुराण दान#तीन पात्र अन्न#गाय दान
दान विधान

मकर संक्रांति पर किसे दान देना चाहिए?

दान देने के सुपात्र: संयमी ब्राह्मण, असहाय, नेत्रहीन, दरिद्र। महिलाएँ: सुहाग-सामग्री, मिट्टी/पीतल पात्र, कुमकुम, हल्दी, अन्न। भविष्य पुराण: सभी वर्ण-आयु के लोगों को क्षमतानुसार दान का अधिकार।

#दान सुपात्र#ब्राह्मण दरिद्र#नेत्रहीन
दान विधान

मकर संक्रांति पर दान का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति = 'दान-पर्व'। राजमार्तंड: इस दिन दान = सामान्य दिनों से करोड़ों गुना (कोटिगुना) पुण्य। सुपात्र को दान दें। धर्मसिंधु: संक्रांति का दान भविष्य जन्मों में सूर्य देव द्वारा लौटाया जाता है।

#मकर संक्रांति दान#दान पर्व#राजमार्तंड
तर्पण

मकर संक्रांति पर तर्पण का मंत्र क्या है?

तर्पण मंत्र (यजुर्वेद): 'ॐ उदीरतामवर उत्पास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः। ॐ आयन्तु नः पितरः सोम्यासोऽग्निष्वात्ताः पथिभिर्देवयानैः॥' विधि: दक्षिण दिशा में मुख करके अंजलि से तिल मिश्रित जल अर्पित करें।

#तर्पण मंत्र#यजुर्वेद#उदीरताम अवर
तर्पण

मकर संक्रांति पर पितरों का तर्पण क्यों करते हैं?

दक्षिणायन = पितृयान, उत्तरायण = देवयान। मकर संक्रांति = दक्षिणायन की समाप्ति + पितरों की विदाई का दिन → तर्पण अनिवार्य। विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण: इस दिन पितर श्राद्ध-तर्पण करने वाला अनंत फल का भागी।

#पितर तर्पण#उत्तरायण#पितृयान देवयान
खिचड़ी और नैवेद्य

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ क्यों खाते हैं?

आयुर्वेद: तिल और गुड़ दोनों ऊष्ण प्रकृति (गर्म तासीर)। शीत ऋतु में वात-वृद्धि और हाइपोथर्मिया से रक्षा। तिल = कैल्शियम + आयरन + अच्छे फैट्स (हड्डी और त्वचा लाभ)। गुड़ = प्राकृतिक मिठास + Iron (ऊष्मा उत्पन्न)।

#तिल गुड़#ऊष्ण प्रकृति#हाइपोथर्मिया
खिचड़ी और नैवेद्य

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का भोग क्यों लगाते हैं?

खिचड़ी भोग: मूंग/छिलके वाली दाल + नए चावल + हल्दी + सेंधा नमक + घी। आयुर्वेद: शीतकाल में सुपाच्य, ऊष्मादायक। त्रिदोष (वात-पित्त-कफ) संतुलक। साथ में तिल-गुड़ के लड्डू और गजक भी।

#खिचड़ी भोग#नैवेद्य#सात्विक भोजन
षोडशोपचार पूजा

मकर संक्रांति पर आदित्यहृदय स्तोत्र क्यों पढ़ते हैं?

आदित्यहृदय स्तोत्र/सूर्याष्टक/सूर्य सहस्रनाम = पूजा के ध्यान चरण में पाठ। कारण: सूर्य = प्रत्यक्ष देवता, 'ब्रह्म' का दृष्टिगोचर स्वरूप (असावादित्यो ब्रह्मा)। ये स्तोत्र इस प्रत्यक्ष देव की स्तुति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम हैं।

#आदित्यहृदय स्तोत्र#सूर्याष्टक#सूर्य सहस्रनाम
षोडशोपचार पूजा

मकर संक्रांति पर कौन से फूल चढ़ाते हैं?

मकर संक्रांति पर सूर्य देव को: लाल पुष्प (गुड़हल, कमल या कनेर) — ये सूर्य देव को अत्यंत प्रिय हैं। साथ में दूर्वा घास भी अर्पित करें। अर्घ्य जल में भी लाल पुष्प डालें।

#सूर्य पुष्प#गुड़हल कमल कनेर#लाल पुष्प
षोडशोपचार पूजा

मकर संक्रांति पर सूर्य देव को कौन से वस्त्र चढ़ाते हैं?

मकर संक्रांति पर सूर्य देव को: पीत (पीले) या रक्त वर्ण (लाल रंग) के वस्त्र अर्पित करें।

#सूर्य वस्त्र#पीत वस्त्र#लाल वस्त्र
षोडशोपचार पूजा

मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा की षोडशोपचार विधि क्या है?

सूर्य षोडशोपचार पूजा के 16 चरण: ध्यान → आसन → पाद्य-अर्घ्य → आचमन-मधुपर्क → स्नान → वस्त्र → यज्ञोपवीत → गंध-कुमकुम → पुष्प-दूर्वा → धूप → दीप → नैवेद्य (खिचड़ी) → ताम्बूल-दक्षिणा → आरती → प्रदक्षिणा → पुष्पांजलि-क्षमा।

#षोडशोपचार#16 उपचार#सूर्य पूजा
अभेद दर्शन

मकर संक्रांति पर शिव, विष्णु और सूर्य एक साथ क्यों पूजे जाते हैं?

मत्स्य पुराण: ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य में कोई भेद नहीं — मकर संक्रांति अभेद-दर्शन का पर्व। श्लोक: 'यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्ण्वर्कपद्मजान्...' — शिव, विष्णु, सूर्य, ब्रह्मा सब एक हैं।

#अभेद दर्शन#शिव विष्णु सूर्य#मत्स्य पुराण
सूर्य अर्घ्य

मकर संक्रांति पर सूर्य अर्घ्य का मंत्र क्या है?

सूर्य अर्घ्य मंत्र: (1) 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' — 11 या 108 बार, (2) कालिका पुराण: 'ॐ नमो विवस्वते ब्रह्मन् भास्वते विष्णुतेजसे...' (3) 'एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥'

#सूर्य अर्घ्य मंत्र#ॐ घृणि सूर्याय#एहि सूर्य
सूर्य अर्घ्य

मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य कैसे देते हैं?

सूर्य अर्घ्य विधि: उदित सूर्य की ओर मुख → तांबे के लोटे को हृदय-नेत्र से ऊपर उठाएं → धीमी धार से जल पृथ्वी पर गिराएं → दृष्टि जलधारा के बीच से सूर्य बिंब पर। तीन बार प्रदक्षिणा → साष्टांग प्रणाम।

#सूर्य अर्घ्य विधि#तांबे का लोटा#उदित सूर्य
संकल्प विधि

मकर संक्रांति के संकल्प मंत्र का क्या अर्थ है?

संकल्प मंत्र का अर्थ: 'मैं [गोत्र-नाम] जन्म-जन्मांतर के पाप क्षय + शिव-विष्णु सामीप्य + दुःख-दरिद्रता नाश + श्रीहरि प्रसन्नता के लिए — मकर राशि के सूर्य के इस माघ मास में स्नान, अर्घ्य, देव-पूजन और दान करूँगा।'

#संकल्प मंत्र अर्थ#पाप क्षय#शिव विष्णु सामीप्य
संकल्प विधि

मकर संक्रांति का संकल्प कैसे लेते हैं?

संकल्प विधि: पीले/श्वेत वस्त्र, पूर्वाभिमुख। दाहिने हाथ में जल + कुशा + लाल पुष्प + अक्षत + काले तिल। मंत्र: 'ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः... अमुकगोत्र, अमुकशर्मा... मकरस्थे रवौ माघे प्रातःस्नानं, सूर्य-अर्घ्य-प्रदानं, देवपूजनं तथा दानकर्म अहं करिष्ये।'

#मकर संक्रांति संकल्प#संकल्प मंत्र#गोत्र नाम
स्नान विधि

मकर संक्रांति पर स्नान के समय कौन सा मंत्र पढ़ें?

स्नान मंत्र: 'मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युत! माधव! स्नानेनानेन मे देव! यथोक्तफलदो भव॥' अर्थ: हे गोविंद-अच्युत-माधव! माघ में मकर सूर्य के समय इस स्नान से मुझे शास्त्रोक्त फल दें। यह साधक की शरणागति का प्रतीक।

#स्नान मंत्र#मकरस्थे रवौ माघे#गोविंद अच्युत माधव
स्नान विधि

मकर संक्रांति पर तीर्थ स्नान का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना या प्रयागराज जैसे पवित्र संगम पर तीर्थ स्नान = 'ब्रह्मलोक' की प्राप्ति।

#तीर्थ स्नान#प्रयागराज#गंगा यमुना
स्नान विधि

मकर संक्रांति पर स्नान का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति पर स्नान = नित्य कर्म। धर्मसिंधु: स्नान न करने से 7 जन्म तक दरिद्र और रोगी। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान = 10,000 गोदान का पुण्य।

#मकर संक्रांति स्नान#नित्य कर्म#धर्मसिंधु
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ के लड्डू क्यों खाते हैं?

तिल-गुड़ लड्डू = षट्तिला का छठा प्रयोग। आयुर्वेद: ऊष्मीय ऊर्जा + शीत से रक्षा। ज्योतिष: तिल = शनि का प्रिय; गुड़ = सूर्य का कारक। सूर्य-शनि (पिता-पुत्र) के इस पर्व पर — कड़वाहट मिटाकर मधुरता का प्रतीक।

#तिल गुड़ लड्डू#तिल भक्षण#षट्तिला
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल-हवन में कौन सा मंत्र बोलते हैं?

तिल हवन मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या सूर्य मंत्र से तिल की आहुति। फल: पर्यावरण शुद्धि और नवग्रह — विशेषकर शनि और राहु की शांति।

#तिल हवन#ॐ नमो भगवते#सूर्य मंत्र
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल-तर्पण कैसे करते हैं?

तिल-तर्पण: स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तिल मिश्रित जल (अंजलि) अर्पित करें। फल: पितरों को तृप्ति, वंश वृद्धि और जीवन की बाधाओं का निवारण।

#तिल तर्पण#दक्षिण दिशा#पितर तृप्ति
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल से स्नान कैसे करते हैं?

तिल स्नान: जल में काले तिल डालकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान। देवी पुराण: प्राकृतिक जल उत्तम। फल: शारीरिक-मानसिक शुद्धि और दुर्भाग्य का शमन।

#तिल स्नान#काले तिल जल#ब्रह्म मुहूर्त
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल उबटन कैसे बनाएं और लगाएं?

तिल उबटन (तिलोद्वर्तन): पिसे काले तिल + जौ + गोमूत्र/गोधूलि/मिट्टी = उबटन — स्नान से पूर्व शरीर पर मर्दन। आयुर्वेद: शीत ऋतु में वात दोष शमन, त्वचा के रोम छिद्र खुलते हैं, ऊर्जा संचार।

#तिल उबटन#तिलोद्वर्तन#जौ गोमूत्र
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण: तिल = भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न। श्वेत, काले या भूरे — समस्त पापों और दुष्ट शक्तियों का नाश। मकर संक्रांति पर षट्तिला (तिल के 6 प्रयोग) अनिवार्य।

#तिल महत्व#गरुड़ पुराण#विष्णु पसीना
व्रत-पूर्व तैयारी

मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त में उठना क्यों जरूरी है?

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 48 मिनट पहले) में स्नान = 10,000 गोदान का पुण्य। धर्मसिंधु: संक्रांति पर स्नान न करने से 7 जन्म तक दरिद्र और रोगी। अतः ब्रह्म मुहूर्त में उठना = इस दिन का सर्वप्रथम और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृत्य।

#ब्रह्म मुहूर्त#स्नान#सूर्योदय
व्रत-पूर्व तैयारी

मकर संक्रांति की तैयारी में मानसिक शुद्धि के क्या नियम हैं?

मकर संक्रांति की मानसिक तैयारी: पूर्ण ब्रह्मचर्य पालन, भूमि या कुश के आसन पर शयन, और ईर्ष्या-क्रोध-लोभ का त्याग। यह कायिक-वाचिक-मानसिक शुद्धि की समग्र प्रक्रिया है जो साधक को खगोलीय संक्रमण ग्रहण के योग्य बनाती है।

#मानसिक शुद्धि#ब्रह्मचर्य#कुश आसन
व्रत-पूर्व तैयारी

मकर संक्रांति से एक दिन पहले क्या करना चाहिए?

मत्स्य पुराण: एक दिन पहले मध्याह्न काल में केवल एक बार भोजन = 'एकभक्त व्रत'। कारण: शीत ऋतु का चरमोत्कर्ष + सूर्य ऊर्जा का संक्रमण — पाचन तंत्र (जठराग्नि) को संतुलित और हल्का रखना।

#एकभक्त व्रत#मत्स्य पुराण#एक बार भोजन
पुण्यकाल

मकर और कर्क संक्रांति का पुण्यकाल अन्य संक्रांतियों से अलग क्यों है?

हेमाद्रि और माधव: अन्य संक्रांतियाँ रात्रि में हो तो पुण्यकाल अगले दिन जाता है। परंतु मकर (उत्तरायण) और कर्क (दक्षिणायन) संक्रांति का पुण्यकाल रात्रि में भी पूरे दिन मान्य — क्योंकि ये उत्तरायण/दक्षिणायन के प्रारंभ = ब्रह्मांडीय महत्त्व।

#मकर कर्क संक्रांति#उत्तरायण दक्षिणायन#विशेष माहात्म्य
पुण्यकाल

रात को मकर संक्रांति हो तो पूजा कब करें?

भविष्य पुराण: संक्रांति के दिन रात्रि में भी स्नान और दान किया जा सकता है — यह अपवाद है। हेमाद्रि और माधव: मकर संक्रांति (उत्तरायण) रात्रि में हो तो भी पुण्यकाल पूरे दिन मान्य रहता है। अन्य संक्रांतियाँ अगले दिन स्थानांतरित।

#रात्रि संक्रमण#भविष्य पुराण#अपवाद
पुण्यकाल

मकर संक्रांति का पुण्यकाल कितने समय का होता है?

काल निर्णय: पुण्यकाल = संक्रमण से 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) पूर्व + 16 घटी पश्चात् = कुल 32 घटी (लगभग 12 घंटे 48 मिनट)। 1 घटी = 24 मिनट। हेमाद्रि: 12 दिन पूर्व भी पुण्यकाल। 3,4,5,7,8,9,12 घटी = 'पुण्य-तम'।

#पुण्यकाल#16 घटी#6 घंटे 24 मिनट
मकर संक्रांति परिचय

मकर संक्रांति पर किए कार्यों का फल कितना गुना मिलता है?

धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण: मकर संक्रांति पर स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा। राजमार्तंड: अयन/विषुव संक्रांति पर दान = सामान्य दिनों से करोड़ों गुना (कोटिगुना) पुण्य। दान भविष्य के जन्मों में सूर्य देव द्वारा लौटाया जाता है।

#फल गुना#दान पुण्य#राजमार्तंड
मकर संक्रांति परिचय

मकर संक्रांति की तारीख सौर कैलेंडर पर क्यों है?

भारतीय पंचांग चंद्र-आधारित है, पर मकर संक्रांति पूर्णतः सौर-वर्ष पर आधारित है। कारण: यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (खगोलीय घटना) पर निर्भर है — चंद्रमा पर नहीं। इसीलिए हर साल लगभग 14-15 जनवरी को पड़ती है।

#सौर कैलेंडर#चंद्र पंचांग#14 जनवरी
मकर संक्रांति परिचय

उत्तरायण क्या होता है — देवयान क्यों कहते हैं?

उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर। दक्षिणायन = 'पितृयान'। मकर संक्रांति = उत्तरायण का प्रथम दिन — पितरों की विदाई और देवताओं के स्वागत का पर्व।

#उत्तरायण#देवयान#दक्षिणायन
मकर संक्रांति परिचय

मकर संक्रांति का खगोलीय महत्व क्या है?

मकर संक्रांति = सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण — उत्तरायण (Winter Solstice के निकट) का आरंभ। भारतीय पंचांग चंद्र-आधारित है, पर मकर संक्रांति पूर्णतः सौर-वर्ष (Solar Calendar) पर आधारित है। यह नव-चेतना, स्फूर्ति और स्वास्थ्य का संचार करती है।

#खगोलीय महत्व#सौर वर्ष#राशि परिवर्तन
मकर संक्रांति परिचय

मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?

मकर संक्रांति = सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण। उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता की ओर। धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण आदि: इस दिन स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा।

#मकर संक्रांति#सूर्य संक्रमण#उत्तरायण
त्योहार पूजा

मकर संक्रांति पर गुड़ और तिल के लड्डू बांटने का क्या अर्थ है?

तिल-गुड़: 'गोड गोड बोला' (मधुर सम्बंध), शनि+सूर्य शांति, आयुर्वेद (शीत ऊष्मा), एकता (छोटे दाने=लड्डू), दान पर्व।

#तिल-गुड़#मकर संक्रांति#मिठास
सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

आज की तिथि
आज का पंचांग

तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त और दैनिक प्रश्नोत्तर।