विस्तृत उत्तर
अम्बरीष कथा का सार यह है कि शुद्ध भक्ति तप, योग, शक्ति और क्रोध से भी श्रेष्ठ है। राजा अम्बरीष चक्रवर्ती सम्राट होते हुए भी विनम्र भक्त थे। उन्होंने धर्मसंकट में केवल जल ग्रहण किया, पर दुर्वासा ने इसे अपमान मान लिया। कृत्या राक्षसी और सुदर्शन चक्र की लीला से स्पष्ट हुआ कि भगवान अपने भक्त की रक्षा स्वयं करते हैं। ब्रह्मा, शिव और विष्णु तक ने दुर्वासा को बताया कि भक्त-अपराध का समाधान भक्त की क्षमा से ही होगा। अंत में अम्बरीष ने दुर्वासा को बचाया। यह कथा भक्ति, क्षमा और विनम्रता की विजय है।
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