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विस्तृत उत्तर
बौधायन धर्मसूत्र के अनुसार सात प्रकार के व्यक्ति एक-दूसरे से अति-संबंधित हैं और वे अविभक्तदाय सपिण्ड कहे जाते हैं। वे एक-दूसरे को पिण्ड प्रदान करने के अधिकारी माने गए हैं। यह सिद्धांत दर्शाता है कि पितृ तर्पण केवल व्यक्तिगत कर्म नहीं, बल्कि सात पीढ़ियों तक विस्तृत वंशगत और पारलौकिक संबंध का धर्मशास्त्रीय विधान है।
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