विस्तृत उत्तर
भृगु श्राप और दशावतार की कथा काव्या माता वध से शुरू होती है। असुर शुक्राचार्य की अनुपस्थिति में देवताओं से बचकर काव्या माता की शरण में आए। काव्या माता ने शरणागत धर्म निभाते हुए उन्हें बचाया और इंद्र को तपोबल से रोक दिया। इंद्र विष्णु में छिपे, पर काव्या माता ने दोनों को भस्म करने का संकल्प किया। विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनका वध किया। भृगु ऋषि लौटे, पत्नी-वध देखकर क्रोधित हुए और विष्णु को पृथ्वी पर जन्म लेने तथा पत्नी-वियोग सहने का श्राप दिया। पुराणों में यह सात जन्मों से और लोक-व्याख्या में विष्णु के बार-बार अवतार लेने की भूमिका से जुड़ा माना जाता है।
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