विस्तृत उत्तर
यह एक अत्यंत रोचक पौराणिक प्रश्न है। ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता और चार वेदों के ज्ञाता हैं, फिर भी पृथ्वी लोक पर उनकी पूजा लगभग नहीं होती और उनका केवल एक प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के पुष्कर में है। इसके पीछे पद्म पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित एक कथा है। एक बार ब्रह्मा जी ने पुष्कर में एक महत्त्वपूर्ण यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ के लिए पत्नी का साथ होना अनिवार्य था, किंतु उनकी पत्नी सावित्री समय पर नहीं पहुँच सकीं। शुभ मुहूर्त बीतता देख ब्रह्मा जी ने वहाँ उपस्थित एक स्थानीय स्त्री (कहीं गायत्री, कहीं नंदिनी गाय से प्रकट) से विवाह कर यज्ञ पूर्ण किया। जब देवी सावित्री वहाँ पहुँचीं और अपने स्थान पर किसी अन्य स्त्री को ब्रह्मा के समीप बैठा देखा तो वे अत्यंत क्रोधित हुईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि जिसने यह सारी सृष्टि बनाई, पूरी सृष्टि में उसी की कहीं पूजा नहीं होगी। देवताओं के अनुनय-विनय पर सावित्री ने अपने श्राप में थोड़ी छूट दी — पुष्कर में ब्रह्मा जी का एक मंदिर होगा और वहाँ उनकी पूजा होगी। यही कारण है कि आज भी पुष्कर को छोड़कर पूरे विश्व में ब्रह्मा जी का कोई अन्य मंदिर नहीं है और उनकी नियमित पूजा परंपरा प्रचलित नहीं है।





