विस्तृत उत्तर
देवताओं ने भृगु आश्रम पर आक्रमण इसलिए किया क्योंकि असुर वहाँ शरण लेकर बैठे थे। इंद्र का उद्देश्य था कि गुरु शुक्राचार्य की अनुपस्थिति में असुरों की शक्ति पूरी तरह तोड़ दी जाए। असुर युद्ध से भागकर काव्या माता के पास पहुँचे और उन्होंने उन्हें अभय दे दिया। देवताओं के लिए यह बड़ी बाधा थी, क्योंकि वे असुरों का पीछा करते हुए आश्रम तक आ गए थे। काव्या माता ने शरणागतों को सौंपने से इंकार किया। देवताओं ने बलपूर्वक प्रवेश करना चाहा, जिससे उनका सामना काव्या माता के तपोबल से हुआ और स्थिति विष्णु के हस्तक्षेप तक पहुँच गई।
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