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विस्तृत उत्तर
हयग्रीव भगवान विष्णु का घोड़े-मुख वाला दिव्य रूप माना जाता है। यह रूप ज्ञान, वेद, वाणी, शक्ति और तेज का प्रतीक है। कई वैष्णव और पौराणिक परंपराओं में हयग्रीव को वेदों के उद्धार से जोड़ा जाता है। जब मधु और कैटभ जैसे असुर वेदों को छिपा देते हैं, तब भगवान ज्ञान की रक्षा के लिए हयग्रीव रूप में प्रकट होते हैं। घोड़े का मुख यहाँ केवल शारीरिक आकृति नहीं, बल्कि तीव्र गति, उच्च ध्वनि और वेद-स्वर का प्रतीक भी माना जाता है।
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