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विस्तृत उत्तर
हिरण्याक्ष ने अपने बल और अहंकार से पृथ्वी को रसातल में ले जाकर सृष्टि-व्यवस्था को बाधित किया था। पृथ्वी के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण किया। जब भगवान वराह पृथ्वी को अपनी दाढ़ों पर उठाकर ला रहे थे, तब हिरण्याक्ष ने उन्हें युद्ध के लिए ललकारा। भगवान वराह ने उससे युद्ध करके उसका वध किया। बाहरी रूप से यह अधर्म का नाश था, और भीतर से विजय नामक वैकुण्ठ पार्षद के पहले श्रापित जन्म का उद्धार था।
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