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विस्तृत उत्तर
तपोलोक में जन्म-मरण के लौकिक नियम लागू नहीं होते। यह लोक भौतिक प्रपंचों, क्लेशों और त्रिगुणमयी माया के बंधनों से मुक्त एक विशुद्ध सात्त्विक और चिन्मय लोक है। श्रीविष्णु पुराण और वायु पुराण में तपोलोक के वैराज देवगणों को जन्म-मरण और दाह के प्रभाव से सर्वथा मुक्त बताया गया है। शिव पुराण के अनुसार उनका स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए उन्हें बुढ़ापा, रोग, थकान, शोक या मृत्यु का लौकिक भय नहीं सताता।
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