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विस्तृत उत्तर
पुराणों के अनुसार मधु और कैटभ का जन्म भगवान विष्णु के कान के कर्णमल से हुआ। महाप्रलय के समय भगवान विष्णु अनंत शेष पर योगनिद्रा में शयन कर रहे थे और चारों ओर केवल एकार्णव जल था। उसी अवस्था में उनके कान से निकला कर्णमल जल के संपर्क में आया और दो शक्तिशाली असुरों के रूप में विकसित हुआ। उनमें तमोगुण और रजोगुण की प्रवृत्तियाँ जाग्रत हो गईं, जिससे वे अत्यंत बलवान लेकिन अहंकारी बन गए। यही दोनों आगे चलकर मधु और कैटभ कहलाए और ब्रह्मा जी के सृष्टि-कार्य में बाधा बने।
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