विस्तृत उत्तर
नारद जी के अनुसार पाताल की सुंदरता स्वर्ग से भी अधिक आकर्षक है। उन्होंने कहा कि वहाँ नागों के आभूषणों में सुंदर प्रभायुक्त शुभ्र मणियाँ जड़ी हुई हैं। दैत्य और दानवों की कन्याएँ पाताल लोकों को सुशोभित करती हैं। दानवों और दैत्यों के पुत्र-पुत्रियाँ निरंतर संगीत, वीणा, वेणु, मृदंग, सुगंधित लेप और उत्कृष्ट मदिरा के आनंद में डूबे रहते हैं। नारद जी के इस वर्णन से स्पष्ट होता है कि भौतिक सुख और ऐश्वर्य के मामले में पाताल लोक देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक मोहक हैं।
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