विस्तृत उत्तर
परशुरामजी के स्तुति करके चले जाने के बाद सभा में बड़ा आनन्द छा गया। फिर राजा जनक ने अयोध्या में राजा दशरथ के पास दूत भेजे कि धनुष भंग हो गया, सीताजी ने रामजी को जयमाला पहनाई — अब बारात लेकर आइये।
विश्वामित्रजी ने जनक से कहा — शीघ्र दूत भेजो। दूत अयोध्या पहुँचे और दशरथ को सारा समाचार सुनाया।
दशरथ ने पुत्रजन्म-सा आनन्द अनुभव किया। गुरु वसिष्ठजी ने कहा — 'सजहु बारात बजाइ निसाना' — बारात सजाओ और डंका बजाओ। दशरथ ने सारे रनिवास को बुलाकर जनकजी की पत्रिका सुनाई — सब रानियाँ हर्ष से भर गयीं।





