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विस्तृत उत्तर
शिशुपाल कृष्ण से अकारण ही तीव्र द्वेष रखता था, क्योंकि वह जय का तीसरा शत्रु जन्म था। जय-विजय कथा के अनुसार उसे भगवान का विरोध करना था ताकि शत्रु-भाव से भी उसका मन निरंतर भगवान में लगा रहे। राजसूय यज्ञ में जब श्रीकृष्ण को प्रथम पूज्य चुना गया, तो शिशुपाल का अहंकार भड़क उठा। उसने सभा में कृष्ण को अपशब्द कहे और मर्यादा की सीमा पार की। यही द्वेष अंततः उसके वध और मुक्ति का कारण बना।
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