विस्तृत उत्तर
शिव जी को आशुतोष इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। वे भक्ति की बाहरी सजावट से अधिक भाव और निश्चय को देखते हैं। कोई भक्त श्रद्धा से जल, बेलपत्र या साधारण पूजा भी अर्पित करे तो शिव जी प्रसन्न हो सकते हैं। यही सरलता कई बार दुष्टों के लिए भी वरदान का मार्ग बन जाती है, जैसे रावण, बाणासुर और वृकासुर के प्रसंगों में दिखता है। वृकासुर ने कठोर तपस्या की तो शिव जी करुणा से प्रकट हुए और उसे वरदान दिया। इस कथा में आशुतोष स्वरूप की करुणा और उसके दुरुपयोग का परिणाम दोनों दिखाई देते हैं।
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