विस्तृत उत्तर
श्राद्ध का अन्न पितरों तक वसु, रुद्र और आदित्य श्राद्ध देवताओं के माध्यम से पहुँचता है। श्राद्ध में ब्राह्मणों को दिया गया अन्न सीधे उसी भौतिक रूप में पूर्वजों को प्राप्त नहीं होता। जब यजमान गोत्र और नाम का उच्चारण करके वसु-रुद्र-आदित्य स्वरूप कहकर तर्पण या पिण्डदान करता है, तो ये ब्रह्माण्डीय देव उस आहुति को ग्रहण करते हैं। वे उस तृप्ति को उस विशिष्ट आत्मा तक पहुँचाते हैं और उसके वर्तमान लोक या योनि के अनुसार रूपांतरित करते हैं। देव योनि में यह अमृत, असुर योनि में भोग-विलास, पशु योनि में घास, सरीसृप योनि में वायु और मानव योनि में अन्न-जल, आरोग्य तथा धन-धान्य के रूप में प्राप्त होता है।
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