विस्तृत उत्तर
शुक्राचार्य देवताओं से इसलिए नाराज हुए क्योंकि देवताओं ने उनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाकर असुरों पर आक्रमण किया। असुर उनके शिष्य थे और वे उन्हें संरक्षण देने वाले गुरु थे। जब असुर काव्या माता की शरण में गए, तब देवताओं ने उन्हें पाने के लिए भृगु आश्रम तक पीछा किया। इस संघर्ष में काव्या माता का वध हो गया। शुक्राचार्य के लिए यह केवल राजनीतिक या युद्ध की घटना नहीं थी, बल्कि उनकी माता और उनके गुरु-कुल का अपमान था। इसलिए उन्होंने देवताओं के प्रति अपना विरोध और मजबूत किया और असुरों के पक्ष में अधिक दृढ़ता से खड़े हुए।
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