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विस्तृत उत्तर
इस कथा में सृष्टि की पहली ध्वनि को आदिनाद कहा गया है। यह ध्वनि ॐ के स्थूल उच्चारण से भी सूक्ष्म और अव्यक्त मानी गई है। इसमें सभी मंत्र, वेद, बीज-ध्वनियाँ और ब्रह्मांडीय नियम संभावना रूप में छिपे हुए थे। जब यह नाद फैला, तब शून्य में ऊर्जा, आकाश और आगे सृष्टि का क्रम प्रकट होने लगा।
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