विस्तृत उत्तर
वैकुण्ठ के मुक्त जीव सच्चिदानंद स्वरूप में रहते हैं। वहाँ भौतिक शरीर और माया के दोष नहीं होते, इसलिए रोग और दुख नहीं रहते।
वैकुण्ठ में रोग क्यों नहीं होते को संदर्भ सहित समझें
वैकुण्ठ में रोग क्यों नहीं होते का सबसे सीधा सार यह है: वैकुण्ठ माया और भौतिक रोगों से परे है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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महर्लोक में रोग, बुढ़ापा और भूख क्यों नहीं होती?
महर्लोक विशुद्ध सत्त्वगुण से आच्छादित है जहाँ रजोगुण और तमोगुण का प्रवेश नहीं। इसलिए यहाँ रोग, बुढ़ापा, भूख, थकावट और क्रोध का पूर्णतः अभाव है।
स्वर्ग में बुढ़ापा और रोग क्यों नहीं होते?
स्वर्ग में दिव्य 'भोग-देह' मिलती है जो सात्त्विक ऊर्जा से बनी है। यह पृथ्वी के स्थूल शरीर जैसी नहीं है इसलिए यहाँ बुढ़ापा, रोग और भूख-प्यास नहीं होते।
पाताल लोक में बुढ़ापा और रोग क्यों नहीं होते?
दिव्य औषधियों, जड़ी-बूटियों और रसों के कारण पाताल निवासियों को बुढ़ापा, रोग, झुर्रियां, थकान और दुर्गंध नहीं सताते।
महातल लोक में बुढ़ापा और रोग क्यों नहीं होते?
महातल में दिव्य औषधियों और रसायनों के कारण निवासियों को बुढ़ापा, रोग, थकान या कमजोरी नहीं होती।
तलातल के जीव रोग और वृद्धावस्था से मुक्त क्यों रहते हैं?
प्रबल पुण्य और तलातल के मायावी सुखद वातावरण के कारण वहाँ रोग और वृद्धावस्था नहीं होती।
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