विस्तृत उत्तर
विष्णु जी ने वृंदा को अपनी योगमाया से छल किया। पहले उन्होंने वृंदा के मन में जालंधर की मृत्यु का भयानक स्वप्न डाला। फिर वन में उसे डराने के लिए मायावी राक्षस उत्पन्न किए। वृंदा भागकर एक तपस्वी के पास पहुँची, जो वास्तव में विष्णु ही थे। तपस्वी ने उसे बचाया और फिर माया से जालंधर का कटा सिर और धड़ दिखाया। वृंदा ने अपने पति को जीवित करने की प्रार्थना की। तब विष्णु ने माया से जालंधर का रूप धारण किया। वृंदा ने उसे अपना पति मानकर स्वीकार किया, और उसी क्षण उसका पतिव्रत कवच टूट गया।
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